रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आज 9 जनवरी 2026 को ठेका लाइन कर्मचारियों द्वारा प्रस्तावित प्रतीकात्मक हड़ताल को अवैध घोषित करते हुए सख्त रुख अपनाया है। कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि 12 से 14 जनवरी तक घोषित तीन दिवसीय कार्य बहिष्कार सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है और इसमें शामिल होने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ द्वारा 16 सूत्रीय मांगों को लेकर 12–14 जनवरी 2026 तक प्रतीकात्मक हड़ताल का नोटिस दिया गया था। संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा, जिसके चलते कर्मचारियों को विरोध का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। हालांकि, सीएसपीडीसीएल प्रबंधन ने इस नोटिस को अस्वीकार करते हुए कहा है कि बिजली वितरण जैसी आवश्यक सेवा में किसी भी प्रकार की हड़ताल, चाहे वह प्रतीकात्मक ही क्यों न हो, उपभोक्ताओं के लिए गंभीर असुविधा पैदा कर सकती है।
प्रबंधन का तर्क है कि ठेका लाइनमैन और अन्य तकनीकी कर्मचारी विद्युत आपूर्ति की रीढ़ हैं और उनकी अनुपस्थिति से शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर कंपनी ने हड़ताल को अवैध करार देते हुए चेतावनी दी है कि कार्य बहिष्कार करने वालों पर निलंबन, सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले रायपुर श्रम न्यायालय ने ठेका विद्युत कर्मचारियों की प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल पर छह महीने की रोक लगाई थी। इसके बावजूद यूनियन द्वारा प्रतीकात्मक हड़ताल की घोषणा किए जाने को प्रबंधन न्यायालय के आदेश की भावना के विरुद्ध मान रहा है। कंपनी अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के स्थगन आदेश के रहते किसी भी प्रकार का संगठित कार्य बहिष्कार कानूनन उचित नहीं है।
इस टकराव के बीच उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सीएसपीडीसीएल ने बिजली आपूर्ति बाधित न होने देने का दावा किया है। प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था, अतिरिक्त स्टाफ और निगरानी तंत्र सक्रिय रखने की बात कही है ताकि किसी भी स्थिति में विद्युत आपूर्ति सामान्य बनी रहे।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। यूनियनों का आरोप है कि ठेका कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की जा रही है, जबकि प्रबंधन इसे अनुशासन और सार्वजनिक हित से जोड़कर देख रहा है। जानकारों का मानना है कि छह महीने की न्यायिक रोक समाप्त होने के बाद यह विवाद और गहराने की संभावना रखता है।
फिलहाल, 12–14 जनवरी की प्रतीकात्मक हड़ताल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रबंधन की सख्त चेतावनी के चलते कर्मचारी संगठन अब कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन, ज्ञापन और अन्य वैकल्पिक विरोध तरीकों पर विचार कर सकते हैं, लेकिन काम बंद करने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।



