बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनपद पंचायत पाटन, जिला दुर्ग में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी जागेंद्र कुमार के स्थानांतरण पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दुर्ग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
प्रकरण के अनुसार, जागेंद्र कुमार की नियुक्ति फरवरी 2022 में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के पद पर हुई थी। वर्ष 2023 में उनका स्थानांतरण जनपद पंचायत सक्ती से जनपद पंचायत बेरला, जिला बेमेतरा किया गया। इसके बाद अक्टूबर 2024 में उन्हें जनपद पंचायत बेरला से जनपद पंचायत पाटन, जिला दुर्ग स्थानांतरित किया गया, जहां उन्होंने 27 नवंबर 2024 को कार्यभार ग्रहण किया।
16 दिसंबर 2025 को जारी शासनादेश के तहत जागेंद्र कुमार का स्थानांतरण मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पाटन से प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत राजनांदगांव के पद पर कर दिया गया। इस आदेश से आहत होकर उन्होंने हाईकोर्ट अधिवक्ता मशीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर के माध्यम से याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति पी. पी. साहू के समक्ष हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने तर्क रखा कि जागेंद्र कुमार का मूल पद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत है, जबकि उन्हें जिस पद पर स्थानांतरित किया गया है वह प्रतिनियुक्ति का पद है। प्रतिनियुक्ति के लिए याचिकाकर्ता की सहमति नहीं ली गई, जो विधि के विरुद्ध है। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि उनकी वर्तमान पदस्थापना जनपद पंचायत पाटन में 27 नवंबर 2024 से है और स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 की कंडिका 3.9 के अनुसार एक वर्ष से कम अवधि में पदस्थ अधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।
अधिवक्ता ने यह अतिरिक्त आधार भी रखा कि जागेंद्र कुमार वर्तमान में सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के रूप में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में संलग्न हैं। निर्वाचन नामावलियों से जुड़े इस कार्य के चलते राज्य में ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण पर प्रतिबंध लागू है।
इन सभी तथ्यों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करते हुए न्यायालय ने जागेंद्र कुमार के स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी और संबंधित उत्तरवादी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई में शासन की ओर से प्रस्तुत जवाब के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।



