1997 में रिलीज़ हुई फिल्म Border की अगली कड़ी के रूप में आई Border 2 को लेकर रायपुर सहित देश के कई शहरों में दर्शकों और फिल्म समीक्षकों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिल्म के रिलीज़ के बाद सोशल मीडिया और सिनेमा हॉल से बाहर निकलते दर्शकों के बीच इसकी कहानी, पटकथा और युद्ध दृश्यों को लेकर चर्चा देखी जा रही है।
दर्शकों का एक वर्ग यह मानता है कि Border 2 मूल फिल्म की भावनात्मक और कथात्मक विरासत को आगे बढ़ाने में सफल नहीं हो पाई है। प्रतिक्रिया देने वालों के अनुसार फिल्म की अवधि लगभग तीन घंटे है, लेकिन शुरुआती हिस्से में कहानी की गति धीमी महसूस होती है। कई दर्शकों ने कहा कि पहले दो घंटे में फिल्म मुख्य पात्रों पर केंद्रित रहती है, जबकि कथानक स्पष्ट दिशा में आगे नहीं बढ़ता।
अभिनय को लेकर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। दर्शकों के अनुसार कुछ दृश्यों में संवाद अदायगी और किरदारों की प्रस्तुति जरूरत से ज्यादा नाटकीय प्रतीत होती है। खासतौर पर युद्ध जैसी गंभीर पृष्ठभूमि में अतिरंजित दृश्य फिल्म की वास्तविकता पर असर डालते हैं। कुछ दर्शकों ने यह भी कहा कि कुछ एक्शन दृश्यों में घटनाक्रम स्वाभाविक नहीं लगता, जिससे फिल्म की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े होते हैं।
युद्ध और एक्शन से जुड़े दृश्य, जिन्हें इस शैली की फिल्मों का प्रमुख आकर्षण माना जाता है, फिल्म के अंतिम हिस्से में सीमित दिखाई देते हैं। तकनीकी पक्ष पर प्रतिक्रिया देने वालों ने सीजीआई और युद्ध दृश्यों की प्रस्तुति को लेकर भी असंतोष जताया है। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद दृश्य अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाते।
फिल्म में पाकिस्तान पक्ष से जुड़े ट्रैक को लेकर भी अलग-अलग मत सामने आए हैं। कुछ दर्शकों का कहना है कि यह ट्रैक कहानी में जुड़ा जरूर है, लेकिन इसे विस्तार से विकसित नहीं किया गया, जिससे इसका प्रभाव सीमित रह जाता है।
कुल मिलाकर Border 2 को लेकर रायपुर सहित विभिन्न शहरों में दर्शकों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आ रही हैं। जहां कुछ दर्शक इसे बड़े सितारों वाली देशभक्ति आधारित फिल्म के रूप में देख रहे हैं, वहीं अन्य दर्शकों का मानना है कि कहानी और प्रस्तुति को लेकर फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती। फिल्म को लेकर यह चर्चा आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।


