छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल में पदस्थ संविदा चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. लोकेन्द्र कश्यप को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) छत्तीसगढ़ के आयुक्त एवं मिशन संचालक के आदेश के बाद की गई।
डॉ. लोकेन्द्र कश्यप स्थानीय विधायक व्यास कश्यप के पुत्र हैं। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उनके सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पहले से चर्चा चल रही थी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक डॉ. कश्यप ने अपने फेसबुक अकाउंट के जरिए सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और अस्पतालों में संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर कई पोस्ट साझा किए थे।
बताया गया है कि इन पोस्ट्स में आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन, सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने इसे सेवा नियमों के विपरीत मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
इस मामले में 5 मई को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की ओर से डॉ. लोकेन्द्र कश्यप को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। विभाग ने उनसे सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों को लेकर जवाब मांगा था।
विभागीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. कश्यप द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण और राज्य कार्यालय के समक्ष दिए गए जवाब को संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया।
आधिकारिक आदेश में उल्लेख किया गया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए इस तरह का सार्वजनिक आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1965 और मानव संसाधन नीति 2018 के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया है। इसी आधार पर संविदा सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई।
इस कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। विधायक व्यास कश्यप ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक चिकित्सक का कर्तव्य मरीजों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को सामने लाना होता है। उन्होंने यह भी लिखा कि हाल ही में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किए गए डॉक्टर को संसाधनों की कमी जैसे मुद्दे उठाने पर सेवा से हटा दिया गया।
डॉ. लोकेन्द्र कश्यप की बर्खास्तगी के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और सोशल मीडिया पर सरकारी कर्मचारियों की अभिव्यक्ति को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि विभाग ने अपने आदेश में इसे सेवा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा मामला बताया है।



