गरियाबंद जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। शासन द्वारा प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन की सीनापाली एरिया कमेटी और एसडीके एरिया कमेटी से जुड़े कुल नौ हार्डकोर माओवादियों ने अपने धारित हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों पर कुल 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें कई डिविजनल और एरिया कमेटी स्तर के वरिष्ठ कैडर शामिल हैं, जो वर्षों से छत्तीसगढ़ और ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय थे।

आत्मसमर्पण करने वालों में अंजू उर्फ कविता, बलदेव उर्फ वामनवट्टी, डमरू उर्फ महादेव, सोनी उर्फ बुदरी, रंजीत उर्फ गोविंद, पार्वती उर्फ सुक्की कारम, रतना उर्फ सोमडी कुंजाम, नवीता उर्फ डांगी मंडावी और सरूपा शामिल हैं। इन माओवादियों के पास से छह ऑटोमेटिक हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें AK-47, SLR और .303 रायफल शामिल हैं। अंजू, बलदेव, डमरू और सोनी पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था, जबकि अन्य माओवादियों पर एक से पांच लाख रुपये तक के इनाम थे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन आत्मसमर्पित माओवादियों के खिलाफ गरियाबंद जिले में ही 70 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। कई माओवादी वर्ष 2004 से संगठन में सक्रिय थे और नक्सली विस्तार, हथियार सप्लाई, सुरक्षा दस्तों और एरिया कमेटी संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लंबे समय से जंगलों में कठिन जीवन, संगठन की कमजोर होती विचारधारा, लगातार मुठभेड़ों में साथियों की मौत और आम ग्रामीणों से कटाव ने इन माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, पहले आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों के सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन तथा गांव-जंगलों में लगातार चलाए गए जागरूकता अभियानों ने इसमें अहम भूमिका निभाई। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को नीति के तहत नकद प्रोत्साहन, आवास, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस पूरे अभियान में गरियाबंद पुलिस की E-30 टीम, STF, 19वीं बटालियन CAF, 65वीं और 211वीं बटालियन CRPF तथा COBRA 207 बटालियन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस प्रशासन ने अपील की है कि जो भी माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, वे नक्सल सेल गरियाबंद से संपर्क कर शासन की पुनर्वास योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।



