सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह आदेश शीर्ष अदालत की तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा विस्तृत सुनवाई के बाद पारित किया गया। लखमा पिछले लगभग एक वर्ष से न्यायिक हिरासत में थे और उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्रकरणों में भी उनकी गिरफ्तारी हुई थी।
अदालत ने लखमा को अंतरिम जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि यह राहत सीमित अवधि के लिए है और मामले की अंतिम सुनवाई पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा। आदेश के अनुसार, अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य के बाहर रहना होगा। हालांकि, किसी भी न्यायालयीन कार्यवाही या पेशी के लिए उन्हें राज्य में आने की अनुमति दी गई है।
इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट ने लखमा को अपना पासपोर्ट न्यायालय में जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें अपने वर्तमान निवास का पता और मोबाइल नंबर संबंधित स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराना होगा, ताकि उनकी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में जमानत स्वतः निरस्त की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह तथ्य भी रिकॉर्ड में लिया कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें सैकड़ों गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं। न्यायालय ने माना कि प्रकरण की प्रकृति गंभीर है, लेकिन लंबे समय तक हिरासत और मुकदमे के शीघ्र निष्कर्ष की संभावना को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत देना उचित है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध शाखा की ओर से अदालत को बताया गया कि कवासी लखमा पर शराब व्यापार से जुड़े कथित घोटाले में लगभग 70 करोड़ रुपये के अवैध कमीशन लेने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह राशि संगठित तरीके से अवैध लेन-देन के माध्यम से अर्जित की गई और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए छिपाई गई।
लखमा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उनके मुवक्किल लंबे समय से हिरासत में हैं, जांच लगभग पूरी हो चुकी है और जमानत मिलने से जांच या गवाहों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कवासी लखमा को अस्थायी राहत मिली है, हालांकि शराब घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई अभी जारी है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा बाद में लिया जाएगा।



