छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) कल्पना वर्मा को वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग और गोपनीय पुलिस जानकारी साझा करने के गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन आदेश राज्य के गृह (पुलिस) विभाग द्वारा 5 फरवरी 2026 को जारी किया गया, जो एक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर आधारित है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला दिसंबर 2025 में सामने आया था, जब एक व्यवसायी दीपक टंडन ने पुलिस महानिदेशक को लिखित शिकायत सौंपकर डीएसपी कल्पना वर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में दावा किया गया था कि डीएसपी की कथित गतिविधियों के कारण उसे लगभग 2 से 2.5 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ के उद्देश्य से उसे मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि डीएसपी द्वारा कथित रूप से “लव ट्रैप” के माध्यम से व्यवसायी को फंसाकर धन उगाही की गई। इसके अलावा, व्हाट्सएप चैट के जरिए संवेदनशील और गोपनीय पुलिस सूचनाएं साझा करने के आरोप भी लगाए गए। शिकायत में यह सवाल भी उठाया गया कि अधिकारी द्वारा अर्जित संपत्तियां उसकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह (पुलिस) विभाग द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, डिजिटल संवाद और सेवा अभिलेखों की समीक्षा की गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में कई स्तरों पर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में यह भी पाया गया कि अधिकारी के कुछ कथित बयान और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, विशेषकर व्हाट्सएप चैट, आपस में मेल नहीं खाते।
जांच रिपोर्ट में अधिकारी के आचरण को शासकीय सेवक के दायित्वों के प्रतिकूल बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रथम दृष्टया मामला छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों और पुलिस सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का बनता है। इसी आधार पर गृह विभाग ने डीएसपी कल्पना वर्मा को निलंबित करने का निर्णय लिया।
निलंबन अवधि के दौरान अधिकारी को मुख्यालय से संबद्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं और विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मामले में विस्तृत जांच के बाद आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर एक अहम उदाहरण माना जा रहा है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि आरोपों की पुष्टि होने पर नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



