भटगांव विधानसभा क्षेत्र में बीरपुर 12 मील हनुमान मंदिर (सिलफिली) से कालीघाट महावीरपुर (अंबिकापुर) तक राष्ट्रीय राजमार्ग–43 के डामरी मजबूतीकरण कार्य के लिए 28.19 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना को क्षेत्रीय सड़क संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से जर्जर सड़क के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। स्वीकृति के साथ ही परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, इस स्वीकृति के साथ ही एक सवाल प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। परियोजना से जुड़े बयानों और सार्वजनिक जानकारी में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया गया है। यह तथ्य सामने आने के बाद यह प्रश्न उठ रहा है कि सड़क विकास जैसे बुनियादी ढांचे के कार्यों में उस मंत्री की भूमिका क्या और किस आधार पर है, जिनका विभागीय दायित्व प्रत्यक्ष रूप से सड़क, लोक निर्माण या परिवहन से संबंधित नहीं है।
सरकारी प्रक्रिया के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े कार्य सामान्यतः लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अथवा संबंधित तकनीकी विभागों के माध्यम से संचालित होते हैं। ऐसे में किसी अन्य विभाग की मंत्री द्वारा परियोजना के लिए प्रयास किए जाने को लेकर स्पष्टता की आवश्यकता महसूस की जा रही है। कुछ प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि क्षेत्रीय विधायक या जनप्रतिनिधि अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए समन्वय की भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन परियोजना का तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक दायित्व संबंधित विभागों के पास ही रहता है।
दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि विकास कार्यों का श्रेय लेने की राजनीति में कई बार विभागीय सीमाएं धुंधली हो जाती हैं। क्षेत्र के कुछ नागरिकों का मानना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए स्वीकृति मिलना सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निर्णय किस विभाग के प्रस्ताव पर और किस प्रक्रिया के तहत लिया गया है। पारदर्शिता की कमी से अनावश्यक संदेह और भ्रम की स्थिति बनती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक व्यापक सवाल को जन्म दिया है कि क्या छत्तीसगढ़ में विकास परियोजनाओं के प्रस्तुतीकरण और श्रेय निर्धारण की प्रक्रिया स्पष्ट है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि समन्वय या अनुशंसा की भूमिका में हैं, तो उसे आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि विभागीय जवाबदेही बनी रहे और किसी तरह की गलतफहमी न हो।
फिलहाल, एनएच-43 के मजबूतीकरण कार्य को क्षेत्रीय विकास के लिए अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजना का क्रियान्वयन किस विभाग के माध्यम से, किस समयसीमा में और किन मानकों के अनुसार किया जाता है, तथा इस पर उठ रहे सवालों का प्रशासनिक स्तर पर क्या स्पष्ट उत्तर दिया जाता है।



