नेपाल में हाल ही में बनी नई सरकार के गठन के एक महीने के भीतर ही राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आने लगी हैं। दो मंत्रियों के इस्तीफे, सीमा नीति को लेकर विवाद और बढ़ती महंगाई के कारण सरकार पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।
सरकार में शामिल गृह मंत्री सुदन गुरूंग ने अपने निजी निवेश और लेनदेन को लेकर उठे सवालों के बीच पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही बनाए रखना आवश्यक है और नैतिकता पद से ऊपर है। इससे पहले श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को भी अपने पद से हटना पड़ा था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर अपनी पत्नी को हेल्थ इंश्योरेंस बोर्ड में पद दिलाने का प्रयास किया। उन्होंने शपथ लेने के 13 दिन के भीतर इस्तीफा दिया था।
इन घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री ने फिलहाल गृह मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अपने पास रखा है। लगातार हो रहे इस्तीफों ने सरकार की कार्यप्रणाली और स्थिरता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ सीमा क्षेत्रों में लागू किए गए नए नियमों को लेकर भी असंतोष बढ़ा है। नए प्रावधान के तहत भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य किया गया है। इस नियम के सख्त पालन के कारण सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में नाराजगी देखी जा रही है, जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर रहते हैं।
आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के प्रभाव से ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल की कीमत लगभग 150 नेपाली रुपये से बढ़कर करीब 225 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ा है और आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ा है।
वर्तमान स्थिति में सरकार के सामने प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने, आर्थिक दबाव को नियंत्रित करने और जन असंतोष को कम करने की चुनौती बनी हुई है। शुरुआती घटनाक्रमों ने सरकार के कामकाज पर निगरानी और सवाल दोनों बढ़ा दिए हैं।


