रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में फरवरी 2026 के अंत तक देश की दूसरी सरकारी IVF सुविधा की शुरुआत होने जा रही है, जो छत्तीसगढ़ के सैकड़ों बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। यह केंद्र राज्य का पहला और केंद्र सरकार द्वारा संचालित IVF केंद्र होगा, जिससे इलाज का खर्च निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम होगा।
AIIMS रायपुर में शुरू होने वाला यह इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) सेंटर आधुनिक तकनीकों से लैस होगा और एक ही जगह व्यापक बांझपन सेवाएं प्रदान करेगा, जिसमें ART (Assisted Reproductive Technology) के तहत जांच, गर्भाधान सहायता और भ्रूण संरक्षण सेवाएँ सम्मिलित हैं। इससे लाभार्थियों को बार-बार अलग-अलग स्थान पर जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
सामान्य अनुमान के अनुसार, इस सरकारी IVF सेवा का खर्च ₹60,000 से ₹80,000 के बीच रखा गया है, जो कि निजी अस्पतालों में ₹1 लाख से ₹3 लाख तक होने वाली इसी प्रकार की प्रक्रिया की तुलना में काफी सस्ती रहेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय दंपतियों को बड़ी सहायता मिलेगी।
AIIMS प्रबंधन के अनुसार इस सुविधा के लिए तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं और दूसरे प्रमुख सरकारी IVF केंद्रों के मुकाबले आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए दिल्ली, भारत के अन्य IVF विशेषज्ञों और तकनीकी सहयोग से भी सहायता ली जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सार्थक पहल प्रदेश ही नहीं, बल्कि आस-पास के राज्यों — जैसे मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र — के उन दंपतियों के लिए भी वरदान साबित होगी, जो बांझपन की समस्या के इलाज के लिए सस्ती और भरोसेमंद विकल्प की तलाश में हैं।
गर्भधारण से जुड़ी चिकित्सा सेवाओं की सुलभता के साथ ही इस सेवा के शुरू होने से स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असंतुलन को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा, जो AIIMS रायपुर जैसे प्रगतिशील सरकारी संस्थान की मातृत्व व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कदम होगा।



