महाराष्ट्र में आतंकवादी फंडिंग से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा कसते हुए प्रवर्तन निदेशालय और एंटी टेररिज़्म स्क्वॉड ने संयुक्त रूप से ठाणे जिले के पड़घा क्षेत्र, बोरीवली गांव, पुणे, मालेगांव और दिल्ली में 40 से अधिक ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की है। गुरुवार की सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई में जांच एजेंसियों ने कई घरों और दफ्तरों में वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और मोबाइल उपकरणों की जांच की। अधिकारियों को संदेह है कि ये नेटवर्क आईएसआईएस से जुड़े वित्तीय चैनलों के माध्यम से अवैध विदेशी फंडिंग प्राप्त कर रहा था, जिसकी पुष्टि के लिए ईडी और एटीएस पिछले कई महीनों से खुफिया विश्लेषण कर रहे थे।
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि जून 2025 में हुई थी, जब एटीएस और ठाणे ग्रामीण पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर 22 लोगों से पूछताछ की थी। उस दौरान साकिब नाचन सहित कई व्यक्तियों से बरामद 19 मोबाइल फोन और दस्तावेजों ने कुछ संदिग्ध धन प्रवाह की ओर संकेत किया था। वही इनपुट आगे ईडी को भेजे गए, जिसने हवाला नेटवर्क और सीमा पार वित्तीय तारों की कड़ी जांच शुरू की। शुरुआती जांच में मिले साक्ष्यों से संकेत मिला कि कुछ संदिग्ध समूह देश के भीतर सक्रिय स्लीपर सेल को आर्थिक मदद मुहैया कराने के लिए जटिल फंड रूटिंग कर रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली तक फैले छापों का उद्देश्य इस नेटवर्क की पूरी वित्तीय संरचना की पहचान करना और उन सभी व्यक्तियों व संस्थाओं को चिह्नित करना है, जो इस फंडिंग श्रृंखला का हिस्सा हो सकते हैं। जबकि ईडी की तरफ से अभी तक औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि यह कार्रवाई एक बड़े आतंक वित्तपोषण मामले की जांच का हिस्सा है और सभी जब्त दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
ठाणे और भिवंडी जैसे क्षेत्रों में इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। इन स्थानों का अतीत में कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़ाव की वजह से पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की निगाहों में रहना पड़ा है। इस बीच राज्य के नागरिक नेतृत्व ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की अपील की है। जांच पूरी होने के बाद ईडी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई—जैसे पीएमएलए और यूएपीए के तहत प्रकरण दर्ज करना—संभव है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई देश में वित्तीय खुफिया आधारित आतंक-रोधी अभियान को नई दिशा दे सकती है और इससे संभावित स्लीपर सेल नेटवर्क को समय रहते निष्क्रिय करने में मदद मिलेगी।



