भारत में एक ऑनलाइन शॉपिंग ऑर्डर को लेकर उपभोक्ता द्वारा गंभीर शिकायत सामने आई है, जिसमें महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद के स्थान पर अलग वस्तु मिलने का दावा किया गया है। यह ऑर्डर एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के “फुलफिल्ड” मॉडल के तहत किया गया था, जिसमें पैकेजिंग और शिपिंग की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म की होती है।

शिकायत के अनुसार ऑर्डर किए गए उत्पाद की जगह पैकेज में डिटर्जेंट मिलने का दावा किया गया है। उपभोक्ता ने यह भी बताया कि शिपिंग लेबल पर दर्ज वजन और सामान्यतः संबंधित उत्पाद के वजन में अंतर पाया गया, जिससे पैकिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

उपभोक्ता का कहना है कि पैकेज बाहरी रूप से सील्ड था, लेकिन अंदर मौजूद उत्पाद के बॉक्स की स्थिति और सीलिंग में बदलाव के संकेत मिले। इस आधार पर उत्पाद के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है। मामले में यह भी संभावना जताई गई है कि सप्लाई चेन या रिटर्न प्रक्रिया के दौरान उत्पाद में बदलाव हुआ हो सकता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राहक सेवा से संपर्क करने पर प्रारंभिक स्तर पर मामला लंबित रखा गया और बाद में प्लेटफॉर्म द्वारा किसी त्रुटि से इनकार करते हुए शिकायत बंद कर दी गई। इस पर उपभोक्ता ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर प्रश्न उठाए हैं।

मामले में कर संबंधी बिंदुओं को लेकर भी कुछ प्रश्न सामने आए हैं, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि आवश्यक बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को उत्पाद प्राप्ति के समय सावधानी बरतनी चाहिए, जिसमें पैकेजिंग की स्थिति, वजन और अनबॉक्सिंग प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना शामिल है। विवाद की स्थिति में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।


