इंदौर शहर में ट्रैफिक पुलिस के प्रधान आरक्षक रंजीत सिंह को विभागीय जांच के बाद डिमोट कर आरक्षक बना दिया गया है। यह कार्रवाई महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने के बाद पुलिस कमिश्नर श्री संतोष कुमार सिंह के आदेश पर की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रंजीत सिंह पर एक महिला ने दोस्ती के लिए प्रस्ताव देने और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था, जिसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच शुरू की गई थी।
जांच के दौरान संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए गए और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की गई। विभागीय जांच में यह पाया गया कि आरोपी प्रधान आरक्षक का आचरण पुलिस अनुशासन और सेवा नियमों के अनुरूप नहीं था। जांच रिपोर्ट में अनुशासनहीनता प्रमाणित होने के बाद पुलिस कमिश्नर द्वारा रंजीत सिंह को प्रधान आरक्षक पद से डिमोट कर आरक्षक बनाए जाने के आदेश जारी किए गए।
पुलिस विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय पुलिस कमिश्नर की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस बल में अनुशासन, शालीन व्यवहार और जनता के प्रति जिम्मेदारी सर्वोपरि है। किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन या अनुचित आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे संबंधित कर्मी कितना ही चर्चित या लोकप्रिय क्यों न हो।
गौरतलब है कि रंजीत सिंह ट्रैफिक पुलिस में तैनाती के दौरान “डांसिंग कॉप” के रूप में सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहे थे। ड्यूटी के दौरान ट्रैफिक नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए उनके वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुए थे, जिससे उन्हें पहचान मिली थी। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता किसी भी कर्मचारी को सेवा नियमों से ऊपर नहीं रख सकती।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों का उद्देश्य विभाग में अनुशासन बनाए रखना और आम नागरिकों का पुलिस व्यवस्था पर विश्वास मजबूत करना है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत प्राप्त होती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी अनुशासन और आचरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन ने सभी पुलिसकर्मियों को सेवा नियमों, आचरण संहिता और जनता के साथ मर्यादित व्यवहार का पालन करने के निर्देश दोहराए हैं।



