छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में हाल ही में हुए भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों के पदोन्नति आदेशों को लेकर कवर्धा जिले के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने अपने साथ अन्याय होने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और प्रमोशन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उनके बैच के अन्य आईपीएस अधिकारियों की तुलना में उन्हें लगातार पीछे रखा जा रहा है। उन्होंने कहा है कि यह स्थिति न केवल उनके करियर पर प्रभाव डाल रही है, बल्कि इससे उनका मनोबल भी प्रभावित हुआ है। पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि पदोन्नति प्रक्रिया में समान अवसर और पारदर्शिता का पालन किया जाना आवश्यक है।
पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस पत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पदोन्नति व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर व्यापक सवाल खड़े हो रहे हैं।
धर्मेंद्र सिंह ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सभी अधिकारियों को नियमों के अनुसार समान अवसर मिले। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि प्रमोशन प्रक्रिया में निर्धारित मानकों और वरिष्ठता का पालन नहीं किया गया, तो इससे विभाग में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में जारी पदोन्नति सूची में कुछ अधिकारियों को वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर उच्च पदों पर पदोन्नत किया गया है। इसी क्रम में कवर्धा एसपी ने यह सवाल उठाया है कि उनकी योग्यता और सेवा अवधि के बावजूद उन्हें अपेक्षित पदोन्नति क्यों नहीं दी गई।
राज्य पुलिस मुख्यालय स्तर पर इस पत्र की जानकारी पहुंचने के बाद इसे प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है। हालांकि, इस मामले में अभी तक सरकार या गृह विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के बाद प्रमोशन प्रक्रिया की समीक्षा की जा सकती है। पुलिस विभाग के भीतर इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य में पदोन्नति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता पर जोर बढ़ सकता है।



