सोशल मीडिया पर सामने आए एक पोस्ट के बाद ‘मेड इन इंडिया’ लेबलिंग और डी2सी (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांडों की आपूर्ति श्रृंखला को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट द्वारा साझा किए गए दावे में कहा गया है कि कुछ लोकप्रिय भारतीय डी2सी इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्माण और पैकेजिंग चीन में होती है, जबकि भारत में उन्हें ‘मेड इन इंडिया’ के भाव के साथ प्रचारित किया जाता है।
पोस्ट में जिन उत्पादों का उल्लेख किया गया है, वे भारत में व्यापक रूप से बिकने वाले वायरलेस ईयरबड्स बताए गए हैं। दावा यह भी किया गया कि संबंधित उत्पादों का निर्माण, असेंबली और पैकेजिंग चीन स्थित इकाइयों में होती है। इस दावे के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसे उत्पादों की मार्केटिंग में प्रयुक्त देश-उद्गम (कंट्री ऑफ ओरिजिन) संबंधी संकेत स्पष्ट और पारदर्शी हैं।
उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, वर्तमान नियमों के तहत कई ब्रांड ‘डिज़ाइन्ड इन इंडिया’ या ‘मार्केटेड बाय इंडियन कंपनी’ जैसे शब्दों का उपयोग करते हैं, जबकि वास्तविक निर्माण विदेश में होता है। कानूनी रूप से यह संभव है, बशर्ते पैकेजिंग पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। हालांकि, उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि औसत खरीदार के लिए ऐसे संकेत भ्रमित करने वाले हो सकते हैं, खासकर जब प्रचार सामग्री में राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वदेशी भावनाओं का व्यापक उपयोग किया जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का बड़ा हिस्सा चीन पर निर्भर है। भारत सहित कई देशों की कंपनियां लागत और पैमाने के कारण वहां उत्पादन कराती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, समस्या उत्पादन स्थल से अधिक पारदर्शिता की है। यदि किसी उत्पाद का निर्माण विदेश में होता है, तो उसकी जानकारी उपभोक्ता को स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए, ताकि वह सूचित निर्णय ले सके।
इस मुद्दे पर अब तक संबंधित ब्रांड की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि की गई है। फिर भी, मामला उपभोक्ता अधिकारों और लेबलिंग मानकों की ओर ध्यान खींच रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि दावे सही पाए जाते हैं, तो नियामक एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘मेड इन इंडिया’ से जुड़े संकेत भ्रामक न हों और नियमों का कड़ाई से पालन हो।
छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में उपभोक्ता तेजी से डी2सी ब्रांडों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में पारदर्शिता और भरोसा इस क्षेत्र की अहम जरूरत मानी जा रही है। उपभोक्ता समूहों का मानना है कि स्पष्ट लेबलिंग और सत्यापित जानकारी से ही बाजार में विश्वास कायम रह सकता है। फिलहाल, यह विषय जांच और सार्वजनिक चर्चा के दायरे में है, और आगे की स्थिति आधिकारिक स्पष्टीकरण या नियामकीय कदमों पर निर्भर करेगी।



