न्यूजीलैंड में बड़े पैमाने पर मेथामफेटामिन तस्करी मामले में दोषी ठहराए गए बलतेज सिंह की पहचान सार्वजनिक करने के खिलाफ दायर याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने यह फैसला सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देते हुए दिया और पहले जारी नाम गोपनीय रखने के आदेश को समाप्त कर दिया।
बलतेज सिंह, जो भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक हत्यारे का भतीजा बताया जाता है, इस मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का प्रमुख रहा है। न्यूजीलैंड की अदालत ने उसे 22 वर्ष की सजा सुनाई है। जांच एजेंसियों के अनुसार उसने एक संगठित नेटवर्क के जरिए विभिन्न देशों से ड्रग्स की आपूर्ति की व्यवस्था बनाई थी।
जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के जरिए मेथामफेटामिन को पेय पदार्थों के कंटेनरों में छिपाकर न्यूजीलैंड भेजा जाता था। वर्ष 2021 और 2022 के दौरान नारियल पानी, बीयर और अन्य पेय पदार्थों के नाम पर भेजे गए शिपमेंट में तरल रूप में ड्रग्स छिपाए गए थे। बाद में इन्हें प्रोसेस कर क्रिस्टल मेथ में बदला जाता था।
न्यूजीलैंड पुलिस ने इस ऑपरेशन में 700 किलोग्राम से अधिक मेथामफेटामिन जब्त किया, जिसे देश के इतिहास की सबसे बड़ी ड्रग बरामदगी में शामिल किया गया है। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब एक शिपमेंट से जुड़ा बीयर का कैन गलती से एक व्यक्ति को दे दिया गया, जिसके बाद मामला सामने आया और जांच शुरू हुई।
बलतेज सिंह के परिवार ने अदालत में यह तर्क दिया था कि उसकी पहचान सार्वजनिक होने से उनके परिवार को खतरा हो सकता है। प्रारंभिक स्तर पर अदालत ने इस आधार पर नाम गोपनीय रखने की अनुमति दी थी। हालांकि, बाद में सरकार की अपील पर अदालत ने कहा कि इतने बड़े अपराध में दोषी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक करना आवश्यक है और इससे जुड़े जोखिम सीमित हैं।
अदालत के निर्णय के बाद अब बलतेज सिंह की पहचान सार्वजनिक हो चुकी है। जांच एजेंसियां इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।


