राजधानी रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर साझा की गई एआई से निर्मित एक तस्वीर को लेकर दर्ज साइबर शिकायत के बाद थाने में हुई पूछताछ से धार्मिक संवेदनशीलता और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला उस समय सामने आया जब एक स्थानीय नागरिक और मीडिया संस्थान से जुड़े व्यक्ति ने फेसबुक के एक मीम पेज पर साझा की गई एक तस्वीर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई।
शिकायत के अनुसार, उक्त तस्वीर एआई तकनीक से तैयार की गई थी, जिसमें एक हाईवे के माइलस्टोन को शिवलिंग के स्वरूप में दर्शाया गया था। तस्वीर में भगवा रंग का उपयोग करते हुए कुछ लोगों को उस प्रतीक की पूजा करते हुए दिखाया गया था। शिकायतकर्ता का कहना था कि इस तरह की प्रस्तुति से हिंदू धर्म की आस्थाओं का उपहास होता है और उसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसी आधार पर उसने साइबर माध्यम से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित व्यक्ति को डीडी नगर थाना बुलाया गया। वहां थाना प्रभारी द्वारा उससे तस्वीर को लेकर उसकी आपत्ति और धार्मिक भावनाएं आहत होने के कारणों के संबंध में पूछताछ की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, बातचीत के दौरान की गई कुछ टिप्पणियों और उदाहरणों से वह असहज महसूस करने लगा। उसका कहना है कि धार्मिक प्रतीकों के अर्थ और महत्व को जिस तरह समझाने का प्रयास किया गया, उससे उसे मानसिक दबाव महसूस हुआ।
शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान उससे उसके पेशे को लेकर सवाल किए गए, जिन्हें उसने व्यंग्यात्मक टिप्पणी के रूप में लिया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बढ़ती असहजता और मानसिक दबाव के चलते उसने अंततः अपनी शिकायत वापस ले ली। थाने से बाहर आने के बाद उसने पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सोशल मीडिया पर एआई से निर्मित तस्वीरों, वीडियो और अन्य सामग्री की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक के दुरुपयोग से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर विवाद की आशंका भी बढ़ी है। ऐसे मामलों में शिकायतों की जांच और शिकायतकर्ताओं से संवाद के दौरान संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक हो जाता है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह घटना इस सवाल को भी जन्म देती है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में पुलिस तंत्र को किस तरह की प्रशिक्षण और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून का पालन और धार्मिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है।
फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई गई है, लेकिन यह प्रकरण एआई आधारित सामग्री, धार्मिक भावनाओं और पुलिस की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।



