रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के दौरान झारखंड की तीरंदाज कोमालिका बारी एशियाई खेलों के चयन की अंतिम प्रक्रिया के बीच अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। वर्ष 2021 में विश्व कैडेट और विश्व जूनियर दोनों खिताब जीतकर पहचान बनाने वाली कोमालिका वर्तमान में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हैं और चयन सूची के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं।
जमशेदपुर की रहने वाली 24 वर्षीय खिलाड़ी जूनियर स्तर पर सफलता के बाद सीनियर सर्किट में स्थिर स्थान बनाने की कोशिश कर रही हैं। एशियाई खेलों और आगामी ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए वह पुणे में चल रहे प्रशिक्षण शिविर में तकनीकी सुधार के साथ मानसिक मजबूती पर भी काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचने के कारण तैयारी को और अधिक सघन किया गया है तथा प्रतियोगिताओं में लगातार भाग लेकर अनुभव बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
कोमालिका बारी ने कहा कि उनका लक्ष्य 2028 ओलंपिक है और इसके लिए वह निरंतर अभ्यास कर रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन में मानसिक संतुलन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, इसलिए प्रशिक्षण के दौरान इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि खेल के सफर में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन निरंतर प्रयास और अनुशासन से उन्हें पार किया जा सकता है।
रायपुर में जारी प्रतियोगिता में कोमालिका व्यक्तिगत, टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में हिस्सा ले रही हैं। वह इस मंच को जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानती हैं। उनके अनुसार, इस तरह के आयोजनों से नए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
कोमालिका बारी ने तीरंदाजी की शुरुआत कम उम्र में की थी। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के कारण शुरुआती दौर में उन्हें अभ्यास के लिए बांस से बने अस्थायी धनुष का उपयोग करना पड़ा। बाद में उन्होंने जमशेदपुर स्थित टाटा आर्चरी अकादमी में प्रवेश लिया, जहां प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में नियमित अभ्यास शुरू किया। प्रशिक्षण के शुरुआती वर्षों में उन्हें रोजाना लंबी दूरी तय कर अभ्यास स्थल तक पहुंचना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और इससे अधिक युवाओं को खेलों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार, यह मंच जनजातीय क्षेत्रों के खिलाड़ियों के विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


