रायपुर, 25 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ की किसान-हितैषी धान खरीदी नीति अब राज्य के लिए नई चुनौती बनती नजर आ रही है। इस खरीफ सीजन में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे अतिरिक्त बोनस के चलते पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से बड़े पैमाने पर धान की तस्करी छत्तीसगढ़ की ओर हो रही है। इससे न केवल सरकारी खरीदी प्रणाली पर दबाव बढ़ा है, बल्कि वास्तविक छत्तीसगढ़ी किसानों के हितों पर भी खतरा मंडराने लगा है।
इस वर्ष केंद्र सरकार ने सामान्य धान का MSP ₹2,183 प्रति क्विंटल और ग्रेड-A धान का MSP ₹2,203 प्रति क्विंटल तय किया है। छत्तीसगढ़ सरकार इस पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि और सहकारी समितियों के माध्यम से शत-प्रतिशत खरीदी की गारंटी देती है। यही कारण है कि महाराष्ट्र के कई सीमावर्ती इलाकों से व्यापारी और बिचौलिये धान को अवैध रूप से छत्तीसगढ़ लाकर यहां ऊंचे दामों पर खपाने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र में सीमित खरीदी व्यवस्था और भुगतान में देरी के कारण वहां के किसानों को MSP का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर धान को ट्रकों के जरिए छत्तीसगढ़ में प्रवेश कराया जा रहा है। कई मामलों में पुराने चावल को नए धान के रूप में दिखाने और मिलों के जरिए सरकारी धान की हेराफेरी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन हरकत में आया है। राजनांदगांव, कवर्धा, बिलासपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में विशेष चेकपोस्ट लगाए गए हैं और संदिग्ध वाहनों की सघन जांच की जा रही है। खरीदी केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल सत्यापित किसान, वैध भूमि रिकॉर्ड और पंजीकरण के आधार पर ही धान स्वीकार करें।
विपक्षी दल सरकार पर तस्करी रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं किसान संगठनों का कहना है कि यदि अवैध धान की आवक पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका सीधा नुकसान स्थानीय किसानों को होगा। प्रशासन का दावा है कि सख्त निगरानी, दस्तावेज़ सत्यापन और संयुक्त कार्रवाई से धान तस्करी पर लगाम लगाई जाएगी।
छत्तीसगढ़ की धान खरीदी नीति वर्षों से किसानों के लिए मिसाल रही है, लेकिन अब यही सफलता राज्य के लिए नई चुनौती बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार किस हद तक तस्करी पर नियंत्रण कर पाती है और वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करती है।



