रायपुर। देश की प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनी Swiggy की राजधानी रायपुर में कार्यप्रणाली गंभीर जांच के घेरे में आ गई है। छत्तीसगढ़ समाचार द्वारा की गई ग्राउंड-लेवल जांच में डिलीवरी पार्टनर्स और ग्राहकों—दोनों के लिए सिस्टम में गहरी खामियां सामने आई हैं। यह हालात न केवल गिग वर्कर्स की आजीविका पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि ग्राहकों के भरोसे को भी कमजोर करते हैं।
जांच के दौरान जब रिपोर्टर ने स्वयं स्विगी डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम किया, तो पहली ही डिलीवरी ने सिस्टम की असल तस्वीर सामने रख दी। मरीन ड्राइव जैसे व्यस्त इलाके में 15 मिनट इंतजार के बाद पहला ऑर्डर मिला, जिसकी कुल कमाई मात्र 25 रुपये थी। इससे भी अधिक चौंकाने वाली स्थिति रेस्टोरेंट स्तर पर देखने को मिली। एक नामी रेस्टोरेंट में ऑर्डर को ऐप पर “रेडी” दिखाया गया, जबकि भोजन पैक तक नहीं हुआ था। खाना पहली मंज़िल पर तैयार किया गया, लेकिन ग्राउंड फ्लोर पर हैंडओवर में अतिरिक्त देरी हुई। रेस्टोरेंट स्टाफ की बजाय एक सिक्योरिटी गार्ड द्वारा डिलीवरी पार्टनर्स की एंट्री, निजी जानकारी का रिकॉर्ड और खाने की दोबारा जांच कराना, समय की खुली बर्बादी साबित हुआ।
इसके बाद ग्राहक का पता ढूंढने में भी भारी परेशानी हुई। अस्पष्ट लोकेशन, गलत एंट्री गेट और अपर्याप्त संवाद के कारण लगभग 15 मिनट और खर्च हो गए। कुल मिलाकर एक ऑर्डर पूरा करने में 45 मिनट लगे, जबकि कमाई सिर्फ 25 रुपये रही। डिलीवरी के बाद मरीन ड्राइव जैसे हॉटस्पॉट पर लौटने के बावजूद अगले 15 मिनट तक कोई नया ऑर्डर नहीं मिला। इस तरह प्रति घंटे की कमाई व्यावहारिक रूप से असंभव स्तर पर पहुंच गई।
अगले दिन जांच ग्राहक के नजरिए से की गई, जहां हालात और भी निराशाजनक निकले। ऑर्डर प्लेस होने के बाद डिलीवरी पार्टनर असाइन तो हुआ, लेकिन वह रेस्टोरेंट की ओर बढ़ा ही नहीं। कॉल्स का कोई जवाब नहीं मिला। कस्टमर केयर से संपर्क करने पर स्विगी का एआई चैटबॉट बार-बार केवल डिलीवरी टाइम बढ़ाता रहा, लेकिन किसी इंसान से बात नहीं कराई गई। करीब 30 मिनट बाद जब मानव एजेंट जुड़ा, तो स्पष्ट देरी के बावजूद ऑर्डर कैंसिल करने से इनकार कर दिया गया। अंततः ऑर्डर दोबारा असाइन होकर पहुंचा, लेकिन तब तक खाना ठंडा और बेस्वाद हो चुका था।
स्थानीय स्तर पर स्विगी के प्रबंधन को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। डिलीवरी पार्टनर्स और ग्राहकों का कहना है कि रायपुर में कंपनी का नेतृत्व पूरी तरह अप्रभावी है। बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो रेस्टोरेंट मैनेजमेंट सुधरा और न ही डिलीवरी लॉजिक। बेंगलुरु स्थित मुख्यालय की नीतियां जमीनी हकीकत से कटी हुई प्रतीत होती हैं, जिससे टियर-2 शहरों में सेवा स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि रायपुर जैसे बाजारों में फिलहाल स्विगी की इंस्टामार्ट सेवा ही अपेक्षाकृत स्थिर दिखाई देती है। वहीं, ब्लिंकिट, जियोमार्ट, बिगबास्केट और जेप्टो जैसे प्रतिस्पर्धी तेज़ डिलीवरी और बेहतर ऑपरेशन के साथ आक्रामक विस्तार कर रहे हैं। यदि स्विगी ने डिलीवरी पार्टनर की कमाई, रेस्टोरेंट समन्वय और कस्टमर सपोर्ट में तुरंत सुधार नहीं किया, तो टियर-2 शहरों में उसका आधार कमजोर होना तय है।
छत्तीसगढ़ समाचार की यह जांच स्विगी और अन्य गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक चेतावनी है। जब डिलीवरी पार्टनर शोषण और ग्राहक असंतोष एक साथ सामने आने लगें, तो समस्या व्यक्तिगत नहीं बल्कि सिस्टम की होती है। पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थानीय स्तर पर सशक्त प्रबंधन के बिना ऐसे प्लेटफॉर्म्स का भरोसा कायम रह पाना मुश्किल है।



