रायपुर। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों में पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD/GPS) नहीं लगाए जाने के मामले में 170 बसों के परमिट निरस्त किए जाने की खबर सामने आई है। 23 अक्टूबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि परिवहन विभाग ने नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की है। हालांकि, संबंधित आदेश और प्रभावित वाहनों की सूची उपलब्ध होने पर ही कार्रवाई के दायरे की पूरी पुष्टि की जा सकती है।
यात्री सुरक्षा के लिए डिवाइस अनिवार्य
पैनिक बटन और वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस का उद्देश्य आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा और वाहन की लोकेशन का पता लगाने में मदद करना है। छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध 25 अप्रैल 2019 की अधिसूचना में सार्वजनिक सेवा वाहनों और राष्ट्रीय परमिट वाले संबंधित वाहनों पर AIS-140 मानक के अनुरूप VLTD और पैनिक बटन लगाने की अनिवार्यता का उल्लेख है। यह पुरानी अधिसूचना नियम की पृष्ठभूमि बताती है; 170 परमिट निरस्त होने की हालिया कार्रवाई की पुष्टि अलग आदेश से होनी चाहिए।
यदि परमिट निरस्तीकरण की कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यात्रियों के लिए इसका सीधा महत्व होगा। प्रभावित बसों को वैध परमिट और निर्धारित सुरक्षा उपकरणों के बिना संचालन की अनुमति है या नहीं, यह संबंधित आदेश की शर्तों से स्पष्ट होगा। यात्रियों को अपनी बस सेवा पर असर के बारे में परिवहन विभाग या ऑपरेटर से जानकारी लेनी चाहिए।
परमिट रद्द होने के बाद क्या असर होगा?
23 अक्टूबर को प्रकाशित हरिभूमि की रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने तीन साल का समय दिए जाने के बावजूद निर्धारित उपकरण नहीं लगाने वाली 170 यात्री बसों के परमिट निरस्त किए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निरस्त परमिट वाली बसों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा और नियम विरुद्ध संचालन मिलने पर वाहन जब्त करने की कार्रवाई हो सकती है। रिपोर्ट में बस मालिक के लिए 10 हजार रुपये जुर्माने और छह महीने तक की सजा के प्रावधान का भी उल्लेख है; संबंधित कानून और आदेश के मूल पाठ से इन दंडात्मक विवरणों की पुष्टि जरूरी है।
यात्रियों के लिए व्यावहारिक सवाल यह है कि किन मार्गों की बस सेवाएं प्रभावित होंगी और संचालक वैकल्पिक व्यवस्था कैसे करेंगे। प्रभावित वाहनों की सूची, आदेश की प्रभावी तारीख, अपील या अनुपालन की शर्तें और कार्रवाई का कानूनी आधार परिवहन विभाग के आदेश से ही स्पष्ट होगा। इसलिए 170 बसों की संख्या मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दी जा रही है, न कि इस रिपोर्ट द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित सूची के आधार पर।
स्रोत: हरिभूमि की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट। परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट: cgtransport.gov.in।


