छत्तीसगढ़ के वित्त, वाणिज्य एवं जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी ने खरौद नगर पंचायत स्थित शासकीय लक्ष्मणेश्वर स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित हीरक जयंती समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम में उन्होंने महाविद्यालय के दीर्घ शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, अधिकारी, शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि हीरक जयंती जैसे आयोजन देश की बौद्धिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत को स्मरण करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत लंबे समय तक विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्ति रहा है और शून्य जैसे आविष्कार तथा नालंदा और तक्षशिला जैसे ज्ञान केंद्र देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा के प्रमाण हैं। उन्होंने वर्तमान समय को तकनीक और नवाचार का युग बताते हुए शिक्षा को समयानुकूल, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुखी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मंत्री ने कहा कि आधुनिक भारत के विकास में शिक्षा की केंद्रीय भूमिका है और युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय की स्मारिका “दर्पणग्रंथ” का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, पूर्व संसदीय सचिव अम्बेश जांगड़े, कलेक्टर जन्मेजय महोबे और पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के बाद मंत्री ने सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खरौद में 8 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले अतिरिक्त कक्ष का शिलान्यास किया। इस दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने लक्ष्य निर्धारण और निरंतर परिश्रम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के सर्वांगीण विकास में निर्णायक भूमिका निभाती है और विद्यार्थियों को बदलते समय के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए।
मंत्री ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित आधुनिक तकनीकों के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और आत्मविश्वास बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा के माध्यम से राज्य और देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और छात्र सम्मान के साथ हुआ, जिसमें महाविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।



