जिला सुकमा में 30 जनवरी 2026 को सुकमा पुलिस और आंध्रप्रदेश के अल्लूरि सीताराम राजू जिले की पुलिस के संयुक्त प्रयास से दक्षिण बस्तर डिवीजन में सक्रिय चार माओवादी कैडरों ने हथियारों और गोला-बारूद सहित आत्मसमर्पण किया। कुल आठ लाख रुपये के इनामी इन कैडरों ने “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम, पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण किस्टाराम और गोलापल्ली क्षेत्र में नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना, सड़क संपर्क बढ़ने और लगातार नक्सल विरोधी अभियानों के कारण संभव हुआ है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी से माओवादी गतिविधियों का दायरा सीमित हुआ है और उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में कमी आई है। प्रशासन का कहना है कि विकास योजनाओं की पहुंच बढ़ने से ग्रामीणों का विश्वास शासन-प्रशासन के प्रति मजबूत हुआ है।
आत्मसमर्पण करने वालों में गोलापल्ली एलओएस कमांडर सोढ़ी जोगा पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके अलावा डाबर गंगा उर्फ मड़कम गंगा, सोढ़ी राजे और माड़वी बुधरी पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। चारों ने एसएलआर, इंसास और अन्य राइफलें तथा गोला-बारूद जमा किया। पुलिस के अनुसार ये कैडर सुकमा जिले में कई वर्षों से सक्रिय थे और आठ से अधिक घटनाओं में शामिल रहे हैं। उनसे आगे पूछताछ की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा कि शेष सक्रिय माओवादी कैडरों से भी अपील है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और पुनर्वास योजना का लाभ उठाएं। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों को शासन की नीति के अनुसार आर्थिक सहायता, पुनर्वास और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने कहा कि यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के कमजोर पड़ने का संकेत है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा शिविरों की स्थापना, विकास कार्यों के विस्तार और निरंतर अभियानों से संगठन का आधार सिमट रहा है। उन्होंने बाकी कैडरों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि सरकार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रतिबद्ध है।



