रायपुर में कमिश्नरी प्रणाली के अंतर्गत पुलिस की भूमिका, जिम्मेदारियों और आम नागरिकों की अपेक्षाओं को लेकर सोमवार को शंकर नगर स्थित सभागार में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला (आईपीएस) ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कमिश्नरी प्रणाली का उद्देश्य केवल प्रशासनिक अधिकारों का विस्तार नहीं है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करना है।
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जनविश्वास को सुदृढ़ करना आधुनिक पुलिसिंग की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए प्रत्येक स्तर पर कार्यरत पुलिसकर्मियों को संवेदनशील, जवाबदेह और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों की समस्याओं को समझना और उनका समयबद्ध समाधान करना भी पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
डॉ. शुक्ला ने कहा कि कमिश्नरी प्रणाली में पुलिस को अधिक स्वायत्तता और त्वरित निर्णय की क्षमता मिलती है, लेकिन इसके साथ ही जवाबदेही भी बढ़ जाती है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे अपने अधिकारों का प्रयोग जनहित और पारदर्शिता के साथ करें, ताकि पुलिस की छवि एक भरोसेमंद संस्था के रूप में और मजबूत हो सके।
सेमिनार में रायपुर जिले के आरक्षक स्तर से लेकर पुलिस कमिश्नर स्तर तक के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। इस दौरान डीसीपी नॉर्थ ज़ोन मयंक गुर्जर, डीसीपी वेस्ट संदीप पटेल और डीसीपी सेंट्रल ज़ोन उमेश प्रसाद गुप्ता ने अपने-अपने जोन की कार्यप्रणाली, क्षेत्रीय चुनौतियों, प्राथमिकताओं और अधीनस्थ एसीपी डिवीजनों की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जोन स्तर पर अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और नागरिकों से संवाद को किस तरह प्राथमिकता दी जा रही है।
सेमिनार में एडिशनल डीसीपी तारकेश्वर पटेल, एडिशनल डीसीपी अर्चना झा, एडिशनल डीसीपी राहुद देव शर्मा और एडिशनल डीसीपी आकाश मरकाम सहित सभी सहायक पुलिस आयुक्त और थाना प्रभारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने, शिकायत निवारण को तेज करने और फील्ड स्तर पर समन्वय बढ़ाने से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।
आयोजन के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कमिश्नरी प्रणाली में संवेदनशील और जवाबदेह पुलिसिंग को व्यवहार में उतारना ही इसकी सफलता की कसौटी है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे नागरिकों के साथ संवाद बढ़ाएं, शिकायतों को गंभीरता से लें और कानून के दायरे में रहकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। सेमिनार को पुलिस विभाग में समन्वय, स्पष्टता और जनोन्मुखी कार्यसंस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।



