रायपुर में नए पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला की नियुक्ति को दो सप्ताह से कम समय हुआ है, लेकिन इस दौरान शहर की पुलिसिंग की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हाल के दिनों में सामने आई घटनाओं और कार्रवाइयों से यह संकेत मिल रहा है कि पुलिस का फोकस गंभीर अपराधों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी के बजाय अपेक्षाकृत आसान और कम जोखिम वाली कार्रवाई पर अधिक रहा है।
कमिश्नर की तैनाती के बाद शहर के कई थाना क्षेत्रों में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान, हेलमेट, मॉडिफाइड साइलेंसर और इसी तरह के छोटे उल्लंघनों पर कार्रवाई में तेजी देखी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है, लेकिन नागरिकों और स्थानीय सामाजिक संगठनों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि क्या वर्तमान में रायपुर की कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती यही मुद्दे हैं।
इसी बीच एक मामला सामने आया, जिसमें शहर में वैध रूप से बिकने वाले “गोगो पेपर” के एक खुदरा विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की गई। संबंधित उत्पाद के पैकेट पर निर्माता और वितरक से जुड़ी जानकारियां दर्ज थीं और यह भारतीय मानकों के अनुरूप बताया गया। इसके बावजूद पुलिस ने निर्माण इकाई या सप्लाई चेन की जांच करने के बजाय रिटेल स्तर पर कार्रवाई की। इस घटना को लेकर यह चर्चा तेज है कि क्या कार्रवाई का उद्देश्य वास्तविक अपराध नियंत्रण था या त्वरित परिणाम दिखाना।
दूसरी ओर, रायपुर के कुछ इलाकों, विशेषकर बैजनाथपारा जैसे क्षेत्रों में देर रात तक दुकानों के खुले रहने, संदिग्ध गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर आपराधिक घटनाओं की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन इलाकों में सख्त कार्रवाई अपेक्षित थी, लेकिन अक्सर केवल गश्त तक सीमित कदम उठाए जाते हैं। इससे पुलिस की निष्पक्षता और प्राथमिकताओं को लेकर असंतोष की स्थिति बन रही है।
नागरिक शिकायत तंत्र को लेकर भी सवाल उठे हैं। डीडी नगर थाना क्षेत्र में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे कुछ नागरिकों का दावा है कि उन्हें एफआईआर दर्ज कराने में कठिनाई हुई, जबकि कमिश्नर स्तर पर सभी शिकायतों को दर्ज करने की बात कही गई थी। ऐसे मामलों ने थाने स्तर पर निर्देशों के पालन को लेकर भी चर्चा को जन्म दिया है।
कुल मिलाकर, कमिश्नरी प्रणाली से शहर में बेहतर कानून-व्यवस्था और नागरिकों के साथ जवाबदेह पुलिसिंग की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि शुरुआती दौर में सामने आई कार्रवाइयों से यह बहस तेज हुई है कि पुलिस का ध्यान संतुलित अपराध नियंत्रण पर है या केवल त्वरित और दिखने योग्य कदमों पर। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि रायपुर पुलिस की रणनीति गंभीर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की ओर बढ़ती है या मौजूदा रुझान जारी रहता है।



