छत्तीसगढ़ में चाय खेती को लेकर नई संभावनाओं पर चर्चा उस वक्त सामने आई, जब राज्यपाल श्री रमेन डेका से लोकभवन में छत्तीसगढ़ चाय व्यापारी संघ एवं छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष श्री महेंद्र कुमार बागड़ोदिया ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश में चाय उद्योग के विस्तार, चाय की खेती की संभावनाओं और इससे जुड़े आर्थिक अवसरों पर विस्तार से बातचीत हुई।
लोकभवन में हुई इस मुलाकात के दौरान महेंद्र कुमार बागड़ोदिया ने राज्यपाल को अपने लंबे अनुभव की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1964 से कोलकाता की टी इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं और कई दशकों से चाय व्यवसाय के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे रायपुर में चाय व्यापार से जुड़े हैं और प्रदेश में इस क्षेत्र की संभावनाओं पर लगातार काम कर रहे हैं।
चर्चा के दौरान बागड़ोदिया ने राज्यपाल के सामने छत्तीसगढ़ में चाय खेती की संभावनाओं को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुछ इलाकों में जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियां ऐसी हैं, जहां चाय उत्पादन को लेकर संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। अगर इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए, तो यह सिर्फ कृषि क्षेत्र के लिए नहीं बल्कि स्थानीय रोजगार और व्यापार के लिए भी नए अवसर खोल सकता है।
राज्यपाल श्री रमेन डेका, जो खुद असम जैसे चाय उत्पादन के लिए प्रसिद्ध राज्य से आते हैं, उन्होंने भी इस विषय पर गंभीरता से चर्चा की। बताया गया कि मुलाकात के दौरान उन्होंने असम के चाय बागानों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में चाय उद्योग विकसित करने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
राज्यपाल ने कहा कि चाय सिर्फ एक पेय पदार्थ का कारोबार नहीं है, बल्कि यह कृषि, उद्योग, रोजगार और निर्यात से जुड़ा बड़ा आर्थिक क्षेत्र भी बन सकता है। उन्होंने इस दिशा में संभावनाओं को समझने और आगे आवश्यक मार्गदर्शन देने की बात कही।
छत्तीसगढ़ में चाय खेती फिलहाल बड़े स्तर पर नहीं होती, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान कर वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग शुरू किए जाएं, तो आने वाले समय में यह प्रदेश के लिए नया कृषि विकल्प बन सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी नए फसल मॉडल को अपनाने से पहले मिट्टी, तापमान, वर्षा और बाजार की संभावनाओं का अध्ययन जरूरी होता है। ऐसे में चाय उत्पादन जैसे क्षेत्र में पहल भविष्य के लिए दिलचस्प संभावनाएं खोल सकती है।
व्यापार जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर छत्तीसगढ़ में चाय खेती को लेकर व्यवहारिक स्तर पर अध्ययन और पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाते हैं, तो इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा एक वैकल्पिक आय का जरिया भी मिल सकता है।
लोकभवन में हुई इस मुलाकात को व्यापार और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग संभावनाओं की शुरुआती चर्चा के तौर पर देख रहे हैं। फिलहाल यह सिर्फ विचार-विमर्श का चरण है, लेकिन चाय उद्योग जैसे बड़े क्षेत्र को लेकर चर्चा ने निश्चित रूप से उत्सुकता बढ़ा दी है।



