दुर्ग जिला अस्पताल मौत मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है। जिला अस्पताल में भर्ती 22 वर्षीय युवती दीपिका की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि युवती को समय पर रक्त उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके चलते उसकी जान चली गई।
जानकारी के अनुसार दीपिका पिछले कई दिनों से जिला अस्पताल में भर्ती थी और उसका इलाज चल रहा था। परिजनों का दावा है कि चिकित्सकों ने रक्त की आवश्यकता बताई थी, जिसके बाद परिवार लगातार डोनर और रक्त की व्यवस्था करने में जुटा रहा।
परिजनों के मुताबिक बीते 48 घंटे के दौरान उन्होंने कई लोगों से संपर्क किया और अस्पताल प्रबंधन से भी मदद की गुहार लगाई, लेकिन समय रहते रक्त उपलब्ध नहीं हो सका। उनका आरोप है कि इसी वजह से युवती की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और बुधवार दोपहर उसकी मौत हो गई।
बेटी की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवती की मां सदमे में जमीन पर गिर पड़ी और लंबे समय तक बेसुध अवस्था में रही।
परिवार ने बताया कि दीपिका ने 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईटीआई का प्रशिक्षण लिया था। वह परिवार की आर्थिक सहायता के लिए एक कपड़े की दुकान में काम करती थी और घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटा रही थी।
मामले को लेकर परिजनों ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय पर रक्त की व्यवस्था हो जाती तो शायद युवती की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भी लोगों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चा होती रही।
वहीं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज ने कहा है कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल युवती की मौत के वास्तविक कारणों और रक्त उपलब्धता को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उपचार के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।



