क्या Slice Bank RBI के नियमों का पालन कर रहा है या अपना अलग नियम बना चुका है?
भारत में बैंकिंग व्यवस्था भरोसे पर चलती है। प्रत्येक बैंक को जनता से जमा स्वीकार करने और बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लाइसेंस के माध्यम से मिलता है। लेकिन इस अधिकार के साथ एक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है—RBI के निर्देशों का पालन करना, ग्राहकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाए रखना।
इसी पृष्ठभूमि में Slice Bank के साथ हुए एक अनुभव ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। क्या बैंक वास्तव में RBI के ग्राहक सेवा संबंधी दिशानिर्देशों का पालन कर रहा है, या उसने अपनी अलग कार्यप्रणाली विकसित कर ली है?
मामला क्या है?
करंट अकाउंट खोलने की प्रक्रिया के दौरान वीडियो केवाईसी (Video KYC) इसलिए रोक दी गई क्योंकि उस समय प्रस्तुत किया गया उद्यम (Udyam) प्रमाणपत्र निरस्त हो चुका था। बाद में नया और वैध उद्यम प्रमाणपत्र बनाकर बैंक को उपलब्ध कराया गया।
समस्या दस्तावेजों के सत्यापन की नहीं थी। वास्तविक समस्या यह थी कि बैंक की प्रणाली में आवेदन स्थायी रूप से “Rejected” स्थिति में अटका रहा, जिसके कारण नया आवेदन करना भी संभव नहीं था।
ग्राहक सहायता (Customer Support) से संपर्क करने पर बार-बार आश्वासन दिया गया कि आवेदन को रीसेट कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।
शिकायत और मिला कथित टेम्पलेट जवाब
जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मामला बैंक के Principal Nodal Officer के समक्ष उठाया गया। शिकायत का उद्देश्य स्पष्ट था—
- आवेदन क्यों लॉक है?
- नया आवेदन क्यों नहीं किया जा सकता?
- ग्राहक सहायता द्वारा दिए गए रीसेट के आश्वासन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- तकनीकी समस्या का समाधान कब होगा?
लेकिन शिकायत के उत्तर में बैंक की ओर से कथित रूप से ऐसा ईमेल भेजा गया जिसमें आय (Income) संबंधी दस्तावेज जमा करने को कहा गया।
शिकायत में उठाए गए किसी भी मूल प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया। न आवेदन के लॉक होने का कारण बताया गया, न तकनीकी समस्या पर कोई स्पष्टीकरण दिया गया और न ही ग्राहक सहायता द्वारा दिए गए आश्वासन का उल्लेख किया गया।

क्या यही है प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था?
यहीं से मामला केवल एक बैंक खाते का नहीं रह जाता।
यदि किसी बैंक की शिकायत निवारण प्रणाली ग्राहक द्वारा उठाए गए वास्तविक मुद्दे को पढ़े बिना पूर्वनिर्धारित (Template) उत्तर भेजती है, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या ऐसी व्यवस्था RBI द्वारा अपेक्षित “Effective Grievance Redressal Mechanism” की भावना के अनुरूप है।
Principal Nodal Officer की भूमिका केवल ईमेल भेजने तक सीमित नहीं मानी जाती। इस पद का उद्देश्य शिकायतों का स्वतंत्र परीक्षण करना, तथ्यों का मूल्यांकन करना और ग्राहकों को कारण सहित सार्थक उत्तर उपलब्ध कराना होता है।
यदि शिकायतों का जवाब केवल ऐसे टेम्पलेट से दिया जाए जिनका शिकायत के विषय से कोई संबंध ही न हो, तो शिकायत निवारण प्रणाली का उद्देश्य ही प्रश्नों के घेरे में आ जाता है।
RBI के लिए भी उठते हैं महत्वपूर्ण प्रश्न
भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर यह स्पष्ट करता रहा है कि सभी विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities) को ग्राहकों की शिकायतों का निष्पक्ष, समयबद्ध और सार्थक निस्तारण सुनिश्चित करना चाहिए।
यदि किसी शिकायत का उत्तर वास्तविक मुद्दों की जांच किए बिना केवल औपचारिक ईमेल भेजकर दिया जाता है, तो यह उस उद्देश्य को कमजोर कर सकता है जिसके लिए शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई गई है।
इसी कारण आवश्यक है कि RBI यह जांच करे कि क्या Slice Bank और उसका बैंकिंग साझेदार North East Small Finance Bank अपनी शिकायत निवारण प्रणाली का संचालन RBI के निर्देशों के अनुरूप कर रहे हैं।
यदि जांच में यह सामने आता है कि शिकायतों का निस्तारण नियमित रूप से वास्तविक परीक्षण के बजाय असंबंधित या पूर्वनिर्धारित उत्तरों के माध्यम से किया जा रहा है, तो नियामक को उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर उपयुक्त पर्यवेक्षी (Supervisory) और प्रवर्तन (Enforcement) कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।
बैंकिंग लाइसेंस अधिकार नहीं, जिम्मेदारी है
बैंकिंग लाइसेंस किसी संस्था का स्थायी अधिकार नहीं, बल्कि एक नियामकीय विशेषाधिकार है। इसके साथ यह दायित्व भी जुड़ा है कि बैंक RBI के नियमों, ग्राहक अधिकारों और शिकायत निवारण संबंधी मानकों का ईमानदारी से पालन करे।
ग्राहकों को केवल शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक समस्या का समाधान और तर्कसंगत उत्तर मिलने का अधिकार है।



