रायपुर: छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने जा रहा है। मौसम विभाग ने आगामी चार दिनों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई है। कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है, जिसके मद्देनजर नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि बिलासपुर जिले में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हुई। राज्य में 1 जून से अब तक हुई मानसून की कुल बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत कम रही है।
स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने प्रदेश के 16 जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और बारिश की संभावना के चलते येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें सरगुजा, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर, बिलासपुर, कोरबा, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायपुर, बलौदाबाजार, दुर्ग, बेमेतरा और राजनांदगांव जिले शामिल हैं। राजधानी रायपुर में आज आसमान में बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है, जहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता और मौसमी गतिविधियां
छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले कुछ हफ्तों से मानसूनी गतिविधियां थोड़ी धीमी पड़ी थीं, जिसके चलते कृषि कार्यों और सामान्य जनजीवन पर भी इसका असर देखने को मिल रहा था। हालांकि, मौसम विज्ञानियों के ताजा आकलन के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और अन्य मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने से अब स्थिति में बदलाव आ रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले चार दिनों तक झमाझम बारिश के आसार जताए गए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि यह नया दौर उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में अधिक प्रभावी हो सकता है, जिससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाएगी और उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी।
उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ में मौसम का हाल
मौसम विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरगुजा संभाग के जिलों जैसे कि जशपुर, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर में बादलों की आवाजाही के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना है। इसके साथ ही मध्य छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, कोरबा, मुंगेली, जांजगीर-चांपा और सक्ती जिलों में भी मेघगर्जन के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। दूसरी ओर, दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग और आसपास के इलाकों में भी छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि इस बारिश से राज्य में खरीफ फसलों की सिंचाई और रोपाई के कार्यों को एक नई गति मिलेगी, जो पिछले कुछ दिनों से पानी की कमी के कारण प्रभावित हो रहे थे।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की चेतावनी
राज्य में आगामी चार दिनों के दौरान भारी बारिश और आकाशीय बिजली (वज्रपात) की चेतावनी को देखते हुए आपदा प्रबंधन और राहत विभाग ने पूरी तरह से सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासनों को खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में मुनादी कराने और किसानों व पशुपालकों को खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले खेतों में न जाने की सलाह देने को कहा गया है। हाल ही में पड़ोसी राज्यों और स्थानीय स्तर पर आकाशीय बिजली गिरने से हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया जा रहा है। आपातकालीन सेवाओं और जिला नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे मुस्तैद रहने के आदेश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
कृषि और भू-जल स्तर पर प्रभाव
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस मानसूनी सक्रियता से राज्य के किसानों को काफी राहत मिलेगी। चूंकि 1 जून से अब तक कुल मानसूनी बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत कम दर्ज की गई है, इसलिए इस हालिया दौर की बारिश से धान और अन्य प्रमुख फसलों को आवश्यक नमी मिल सकेगी। भू-जल स्तर में सुधार के लिहाज से भी यह बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौसम विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे मौसम से जुड़ी ताजा जानकारियों पर नजर बनाए रखें और किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें। यात्रा के दौरान सावधानी बरतने और जलभराव वाले निचले इलाकों से दूर रहने की भी ताकीद की गई है।
मौसम प्रणाली और आगामी दिनों का पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में सक्रिय होने वाली इस नई मौसमी प्रणाली का असर राज्य के लगभग सभी संभागों पर पड़ेगा। पिछले कुछ दिनों से मानसून के कमजोर पड़ने के कारण तापमान में बढ़ोतरी और उमस ने लोगों को परेशान कर रखा था, लेकिन अब बादलों के डेरा डालने से पारे में गिरावट आनी शुरू हो गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले चौबीस से अड़तालीस घंटों के दौरान हवा की गति तेज हो सकती है और कुछ चुनिंदा स्थानों पर तीव्र बौछारें दर्ज की जा सकती हैं। किसानों और आम नागरिकों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या दुर्घटना से बचा जा सके। कृषि विभाग ने भी किसानों को खेतों में पानी के प्रबंधन को लेकर उचित कदम उठाने की सलाह दी है।
पड़ोसी राज्यों और स्थानीय स्तर पर वज्रपात के खतरे
हाल ही में पड़ोसी राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों में आकाशीय बिजली गिरने से कुछ गंभीर दुर्घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें देखते हुए छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में विशेष एहतियात बरती जा रही है। मौसम विज्ञानियों ने स्पष्ट किया है कि मानसून के इस सक्रिय चरण के दौरान बादलों के गरजने और चमकने की घटनाएं अधिक頻सी (बार-बार) हो सकती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने स्थानीय निकायों को संवेदनशील और खुले क्षेत्रों में लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी प्रसारित करने के निर्देश दिए हैं। किसानों से विशेष रूप से यह आग्रह किया गया है कि वे खेतों में काम करते समय मोबाइल फोन या धातु के उपकरणों के इस्तेमाल से बचें और बिजली कड़कने के दौरान किसी पक्के मकान या सुरक्षित आश्रय स्थल में शरण लें।
आपदा प्रबंधन और नियंत्रण कक्षों की कार्यप्रणाली
मौसम विभाग के भारी बारिश और वज्रपात के रेड व येलो अलर्ट के मद्देनजर राज्य शासन ने राजधानी रायपुर स्थित आपदा प्रबंधन केंद्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। सभी जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में जलभराव, भूस्खलन की आशंका वाले रास्तों और कमजोर बुनियादी ढांचे पर निरंतर निगरानी रखने को कहा गया है। राज्य नियंत्रण कक्ष से लगातार सभी जिलों के मौसम संबंधी आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत दल को रवाना किया जा सके। मौसम विभाग ने नागरिकों को भी सलाह दी है कि वे सफर पर निकलने से पहले मार्गों की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।



