रायपुर के जेल रोड स्थित होटल बेबीलॉन में शुक्रवार दोपहर लगभग एक बजे सामाजिक कार्यकर्ता बसंत अग्रवाल ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मीडिया के समक्ष स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से फैलाए जा रहे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान बसंत अग्रवाल ने कहा कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक प्रवृत्ति देखी जा रही है, जिसमें बिना तथ्यों के आरोप लगाकर सुर्खियों में आने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी को गाली देकर या आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर स्वयं को चर्चित करना सही पत्रकारिता नहीं है।
बसंत अग्रवाल ने कहा कि वे उन पत्रकारों को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं जो तथ्यों की जांच के बाद ही समाचार प्रकाशित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज तक उनके खिलाफ किसी प्रकार का आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। उन्होंने पूर्व में काली नगर क्षेत्र में हुई हिन्दू-मुस्लिम झड़प से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस प्रकरण में उनका नाम सामने आया था, लेकिन उस पर भी कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ।
प्रेस कांफ्रेंस में बसंत अग्रवाल ने अवैध प्लॉटिंग से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक द्वेष से प्रेरित हैं और उनका उद्देश्य केवल उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि किसी भी आरोप को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग प्रेस कांफ्रेंस और सोशल मीडिया मंचों का दुरुपयोग कर धर्म और समाज से जुड़े मुद्दों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों से न केवल सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है, बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़े होते हैं।
बसंत अग्रवाल ने अपनी सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य शिविरों, युवाओं के लिए जागरूकता अभियानों और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका कार्य और सार्वजनिक जीवन ही उनकी पहचान है और वे पारदर्शिता के साथ कार्य करते रहेंगे।
प्रेस वार्ता के दौरान उपस्थित पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था उनके खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करती है, तो वे जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि मीडिया और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से बचा जाए।



