महाराष्ट्र के नाशिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ कार्यालय में यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के आरोपों का मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और विशेष जांच दल (SIT) द्वारा जांच जारी है। यह मामला फरवरी में एक शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक महिला कर्मचारी पर धार्मिक प्रभाव डाला जा रहा था। इसके बाद नाशिक पुलिस ने गोपनीय जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने कार्यालय में अंडरकवर ऑपरेशन चलाया, जिसमें चार पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में तैनात किया गया। लगभग दो सप्ताह तक चली इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की। जांच में व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए यह सामने आया कि कुछ कर्मचारी सहकर्मियों के साथ यौन शोषण, जबरन संबंध बनाने और धर्म परिवर्तन के प्रयास में शामिल थे।
पुलिस के अनुसार इस मामले में अब तक जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है उनमें आसिफ अंसारी, दानिश शेख, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर और अश्विन चैनानी शामिल हैं। वहीं, एचआर मैनेजर निदा खान फरार बताई जा रही हैं और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस मामले में अब तक नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस का कहना है कि अधिकतर पीड़ित महिलाएं 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग की हैं और वे बीपीओ में कार्यरत थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया गया तथा शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के बैंक खातों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक मदद मिली थी। साथ ही, विदेशी कनेक्शन की भी जांच की जा रही है, जिसमें एक मलेशिया से जुड़े व्यक्ति का नाम सामने आया है, जो वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में था।
TCS प्रबंधन ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि कंपनी में किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या दबाव के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति है। कंपनी ने जांच के दायरे में आए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और पुलिस जांच में सहयोग कर रही है।
इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है और विभिन्न दलों ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल SIT पूरे नेटवर्क, आरोपियों की भूमिका और संभावित अन्य पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है।


