रायपुर और दुर्ग के मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई (नॉन-रेजिडेंट इंडियन) कोटे के तहत हुए प्रवेशों को लेकर पारदर्शिता की मांग उठ रही है। फिलहाल किसी भी प्रकार की अनियमितता सिद्ध नहीं हुई है, लेकिन प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक किए जाने को लेकर सवाल सामने आ रहे हैं।
एनआरआई कोटे का मूल उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के परिवारों के बच्चों को मेडिकल शिक्षा में अवसर उपलब्ध कराना है। हालांकि देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर इस कोटे के उपयोग और पात्रता सत्यापन को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में अब रायपुर और दुर्ग के मेडिकल कॉलेजों में हुए प्रवेशों को लेकर भी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी छात्र ने एनआरआई कोटे के तहत प्रवेश प्राप्त किया है तो उसके आवेदन, प्रायोजक (स्पॉन्सर) की पात्रता तथा दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इससे प्रवेश प्रक्रिया को लेकर उठ रहे संदेह स्वतः समाप्त हो सकते हैं।
देशभर में एनआरआई कोटे को लेकर बहस नई नहीं है। विभिन्न राज्यों में पूर्व में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एनआरआई श्रेणी के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों और रिश्तेदारी संबंधी दावों की जांच की मांग उठी थी। कुछ मामलों में जांच एजेंसियों और अदालतों ने भी प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया है। वर्ष 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मेडिकल प्रवेश से जुड़े एक मामले में कथित फर्जी एनआरआई दस्तावेजों और रिश्तेदारी प्रमाणों के इस्तेमाल की जांच की थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय भी विभिन्न मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि एनआरआई कोटे का लाभ वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों तक पहुंचना चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। इसी कारण प्रवेश प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का रिकॉर्ड सुरक्षित और सत्यापन योग्य होना आवश्यक माना जाता है।
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत नागरिक प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांग सकते हैं। इनमें किसी वर्ष में एनआरआई कोटे के तहत दी गई सीटों की संख्या, पात्रता मानदंड, सत्यापन प्रक्रिया और स्वीकृत आवेदनों से संबंधित प्रशासनिक जानकारी शामिल हो सकती है। हालांकि कई मामलों में निजी संस्थानों और संबद्ध निकायों द्वारा सूचना उपलब्ध कराने को लेकर विवाद भी सामने आते रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा में प्रत्येक सीट का महत्व अत्यंत अधिक होता है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि सभी श्रेणियों में चयन और प्रवेश से जुड़ी प्रक्रियाएं स्पष्ट और पारदर्शी हों। उनका कहना है कि यदि सभी नियमों का पालन किया गया है तो रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से संस्थानों की विश्वसनीयता और मजबूत होगी।
फिलहाल रायपुर और दुर्ग के मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे के तहत हुए प्रवेशों को लेकर किसी प्रकार की अनियमितता आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुई है। लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित संस्थान और अधिकारी प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी किस हद तक सार्वजनिक करते हैं।
इस पूरे मुद्दे का केंद्र किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं, बल्कि सार्वजनिक महत्व की प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। यदि सभी प्रवेश नियमों के अनुरूप हुए हैं तो उपलब्ध रिकॉर्ड इस पर स्पष्टता ला सकते हैं। वहीं यदि कहीं कोई विसंगति सामने आती है तो उसका परीक्षण सक्षम एजेंसियों और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा किया जाना चाहिए।



