डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म Kissht को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (formerly Twitter) पर हाल के दिनों में कई यूजर्स द्वारा शिकायतें सामने आई हैं। अप्रैल और मई 2026 के बीच किए गए पोस्ट्स में रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार, बार-बार कॉल और कथित दबाव से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार द्वारा नहीं की गई है।
21 अप्रैल 2026 को यूजर अमित कुमार देववाल (@AmitKum74264812) ने पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि “किश्त के रिकवरी एजेंट्स ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी,” और इस वजह से वे मानसिक तनाव में हैं। पोस्ट में एक व्यक्ति का नाम और फोन नंबर भी साझा किया गया था। यह दावा गंभीर प्रकृति का है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
24 अप्रैल 2026 को एक अन्य यूजर (@HaqueShahkar) ने पोस्ट में कहा कि उन्हें बार-बार कॉल किए जा रहे हैं और यह भारतीय रिज़र्व बैंक की रिकवरी गाइडलाइंस के खिलाफ है। पोस्ट के साथ साझा स्क्रीनशॉट्स में कई मिस्ड कॉल्स और अलग-अलग नंबरों से संपर्क की जानकारी दिखाई गई।
26 अप्रैल 2026 को @poweroftradeing नामक यूजर ने आरोप लगाया कि डिफॉल्ट की स्थिति में किसी प्रकार का समाधान नहीं दिया जा रहा और लगातार कॉल्स किए जा रहे हैं। इसी पोस्ट में यह भी कहा गया कि “रिकवरी प्रैक्टिस फेयर नहीं है,” हालांकि कंपनी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया पोस्ट में दिखाई नहीं दी।
29 अप्रैल 2026 को यूजर @SivaVasila ने दावा किया कि पूरा भुगतान करने के बावजूद उन्हें कॉल्स आते रहे और कथित तौर पर गलत व्यवहार किया गया। इसी दिन @truthoutloud_0 नामक यूजर ने आरोप लगाया कि कॉल सेंटर एजेंट्स द्वारा “अभद्र भाषा” का उपयोग किया गया, जिसे उन्होंने अस्वीकार्य बताया।
30 अप्रैल 2026 को @gravitwari333 ने एक पोस्ट में दावा किया कि रिकवरी एजेंट द्वारा अनुचित और अपमानजनक प्रस्ताव दिया गया, और उन्होंने इस मामले की शिकायत Reserve Bank of India और साइबर क्राइम में दर्ज कराने की बात कही। यूजर ने यह भी लिखा कि उन्होंने कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य जमा किए हैं।
1 मई 2026 को @BuraiPritish ने पोस्ट में आरोप लगाया कि एनओसी जारी होने के बाद भी अतिरिक्त राशि मांगी गई और इसे “ब्लैकमेलिंग” बताया। वहीं @DharviGrowth ने कहा कि भुगतान प्रक्रिया में देरी के बावजूद रिकवरी एजेंट्स द्वारा विजिट की चेतावनी दी गई।
इसके अलावा, कुछ स्क्रीनशॉट्स में व्हाट्सएप संदेश भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर रिकवरी टीम द्वारा घर या ऑफिस आने की बात कही गई और रेफरेंस नंबरों पर कॉल करने का उल्लेख किया गया। कई यूजर्स ने इसे दबाव की रणनीति के रूप में देखा, हालांकि इन संदेशों की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
गौरतलब है कि भारत में डिजिटल लेंडिंग सेक्टर को लेकर पहले भी नियामकीय चिंताएं सामने आती रही हैं, और किसी भी प्रकार की रिकवरी प्रक्रिया को भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुरूप होना आवश्यक है।
इस संबंध में कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए संपर्क किया गया है। यदि कंपनी की ओर से कोई जवाब प्राप्त होता है, तो उसे इस रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।


