छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में निलंबित आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कार्रवाई करते हुए करीब 4 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की हैं। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच के दौरान की गई है। अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में जुलाई 2024 में प्रकरण दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान ईओडब्ल्यू को कुल नौ अचल संपत्तियों की जानकारी मिली, जिन्हें कथित तौर पर अवैध आय से अर्जित किया गया था। ये संपत्तियां समीर विश्नोई के परिजनों और उनसे जुड़ी फर्मों के नाम पर दर्ज पाई गईं। एजेंसी ने इन संपत्तियों को अटैच करने के लिए रायपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया था।
17 अप्रैल को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने सभी चिन्हित संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश जारी किया। इसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए इन संपत्तियों को अटैच कर लिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब इन संपत्तियों को न तो बेचा जा सकता है और न ही किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित किया जा सकता है।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही समीर विश्नोई से जुड़ी पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर चुका है। कोल लेवी घोटाले से जुड़े इस प्रकरण में अन्य लोक सेवकों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। सितंबर 2025 में पूर्व में मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रही उप सचिव सौम्या चौरसिया से संबंधित संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई थी।
समीर विश्नोई वर्ष 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जिन्हें वर्ष 2022 में प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें अन्य आरोपियों के साथ सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली थी।
कोल लेवी घोटाले में जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कथित तौर पर प्रति टन कोयले के परिवहन पर 25 रुपये की अवैध वसूली की जाती थी। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क में प्रशासनिक अधिकारियों, व्यवसायियों, राजनेताओं और बिचौलियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है।
फिलहाल ईओडब्ल्यू इस मामले में आगे की जांच जारी रखे हुए है और संपत्ति से जुड़े अन्य वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।


