रायपुर के मंत्रालय में अब पहले जैसी तस्वीर कम दिखाई देती है। लंबे टेबलों पर फाइलों के ढेर, एक कमरे से दूसरे कमरे तक फाइल लेकर भागते कर्मचारी और दस्तखत के इंतजार में दिनों तक अटकी प्रक्रिया — धीरे-धीरे यह सब बदल रहा है। उसकी जगह अब कंप्यूटर स्क्रीन पर खुलती डिजिटल फाइलों ने ले ली है।
छत्तीसगढ़ में ई-ऑफिस सिस्टम लागू होने के बाद सरकारी कामकाज की रफ्तार में बदलाव महसूस किया जा रहा है। सचिवालय से लेकर जिला दफ्तरों तक कई विभाग अब ऑनलाइन फाइल सिस्टम पर काम कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इससे फाइलों की आवाजाही तेज हुई है और लंबित मामलों पर नजर रखना आसान हुआ है।
सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि पहले छोटी-छोटी प्रक्रियाओं में भी काफी समय लग जाता था। किसी फाइल को एक शाखा से दूसरी शाखा तक पहुंचने में कई बार पूरा दिन निकल जाता था। अब वही काम कुछ क्लिक में आगे बढ़ रहा है।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 87 हजार 222 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। अब तक 5 लाख 46 हजार 903 से अधिक फाइलों का डिजिटल संचालन किया गया है। 30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों में सक्ती जिला सबसे आगे रहा, जहां 15 हजार 735 फाइलों का ऑनलाइन संचालन दर्ज किया गया।
ई-ऑफिस सिस्टम का सबसे बड़ा असर फाइल ट्रैकिंग पर देखा जा रहा है। अब विभागीय अधिकारी आसानी से देख सकते हैं कि कौन सी फाइल किस टेबल पर रुकी है और कितने समय से लंबित है। इससे जवाबदेही बढ़ी है। कई विभागों में लंबित फाइलों की समीक्षा भी अब ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर होने लगी है।
रायपुर स्थित कुछ विभागों के कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड होने से पुरानी फाइलें खोजने में भी आसानी हुई है। पहले रिकॉर्ड रूम में घंटों लग जाते थे, जबकि अब कई दस्तावेज स्क्रीन पर कुछ सेकंड में उपलब्ध हो जाते हैं।
इस बदलाव का असर कागज के उपयोग पर भी पड़ा है। विभागीय स्तर पर प्रिंट और फोटोकॉपी का काम पहले की तुलना में कम हुआ है। हालांकि पूरी व्यवस्था अभी पूरी तरह पेपरलेस नहीं हुई है, लेकिन कई शाखाओं में दैनिक कामकाज का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन हो चुका है।
डिजिटल सिस्टम लागू होने के साथ शुरुआती दिक्कतें भी सामने आई थीं। कई कर्मचारियों को नई प्रक्रिया समझने में समय लगा। इसके लिए अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। तकनीकी सहायता के लिए National Informatics Centre और CHiPS की टीमों ने विभागीय स्तर पर काम किया।
राज्य सरकार आने वाले समय में अधिकतर शासकीय पत्राचार को पूरी तरह ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी में है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों से जुड़े मामलों में निर्णय प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी।
सरकारी दफ्तरों में यह बदलाव अभी शुरुआती दौर में जरूर है, लेकिन कई विभागों में इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। जिन कार्यालयों में कभी फाइलों की अलमारियां सबसे ज्यादा नजर आती थीं, वहां अब कंप्यूटर स्क्रीन और डिजिटल डैशबोर्ड कामकाज का हिस्सा बनते जा रहे हैं।



