सूरजपुर जिले के कल्याणपुर गांव में हाथी हमले में जान गंवाने वाले दो ग्रामीणों के परिवारों को प्रशासन की ओर से मुआवजा राशि जारी कर दी गई है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री Lakshmi Rajwade के निर्देश के बाद जिला प्रशासन और वन विभाग ने मामले में त्वरित कार्रवाई की।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, सूरजपुर मंडल की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। विभागीय जानकारी के अनुसार कल्याणपुर निवासी मृतकों के परिजनों के खातों में डीबीटी माध्यम से राशि ट्रांसफर की गई है।
मुआवजा राशि के तहत हितग्राही श्रीमती कांति भोई को 5 लाख 50 हजार रुपये और श्रीमती राजेश्वरी सिंह श्याम को 5 लाख 50 हजार रुपये उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। इसके अलावा डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर सूरजपुर को भी 50-50 हजार रुपये डीबीटी माध्यम से जारी किए गए हैं।
घटना के बाद क्षेत्र में वन विभाग की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। ग्रामीण इलाकों में हाथियों की आवाजाही को लेकर निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर वन अमले को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों से कहा था कि प्रभावित परिवारों को सहायता राशि जारी करने में अनावश्यक देरी न हो। उनके निर्देश के बाद विभागीय प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई।
कल्याणपुर और आसपास के गांवों में पिछले कुछ समय से हाथियों की आवाजाही की घटनाएं सामने आती रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से लगे इलाकों में रात के समय लोग अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। कई गांवों में वन विभाग की टीम ग्रामीणों को अलर्ट रहने की सलाह भी दे रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों में निगरानी और जागरूकता दोनों बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। खासकर फसलों और गांवों के आसपास हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र सक्रिय किया गया है।
घटना के बाद प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से त्वरित सहायता की मांग की थी। मुआवजा राशि जारी होने के बाद गांव में प्रशासनिक अमला भी पहुंचा और परिवारों से चर्चा की।
क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत राशि वितरण की प्रक्रिया जल्द पूरी होने पर प्रशासन और वन विभाग के प्रति आभार जताया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण इलाके में भय की स्थिति बनी रहती है और स्थायी समाधान की जरूरत है।



