रायपुर। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ का पिछले 16 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को समाप्त हो गया। संगठन ने बताया कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और पावर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक चर्चा तथा नियमितीकरण एवं समायोजन की मांग पर मिले आश्वासन के बाद आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
संघ के प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर संविदा कर्मचारियों की एक सूत्रीय मांग नियमितीकरण एवं समायोजन पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष हरी चरण साहू, प्रदेश महामंत्री कमलेश भारद्वाज, संयुक्त महामंत्री योगेश साहू, पूर्व महामंत्री उमेश पटेल, प्रदीप राठौर, बाल कृष्ण, अमित साहू, विजय साहू और योगेश चौहान शामिल थे।
संघ के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष ने कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इस विषय पर शासन और पावर कंपनी प्रबंधन स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा। संगठन का कहना है कि डॉ. रमन सिंह ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव से दूरभाष पर चर्चा कर कर्मचारियों की मांगों की समीक्षा करने और समाधान का प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश भी दिए।
संघ ने बताया कि प्रदेशहित और बिजली उपभोक्ताओं को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए तत्काल प्रभाव से आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। संगठन ने उम्मीद जताई कि शासन की ओर से दिए गए आश्वासनों पर समयबद्ध कार्रवाई होगी और नियमितीकरण की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी।
आंदोलन समाप्त होने के बाद संघ ने सभी संविदा कर्मचारियों से बुधवार से अपने-अपने कार्यस्थलों पर पूर्ववत ड्यूटी जॉइन करने और प्रदेश में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की अपील की है।
संघ ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और समाधान की दिशा में पहल करने से संगठन को सकारात्मक संदेश मिला है।
आंदोलन समाप्त होने के बाद संघ द्वारा बताई गई प्रमुख उपलब्धियां
- निशर्त कार्य पर वापसी का निर्णय
- आंदोलन अवधि में वेतन कटौती से राहत का आश्वासन
- बीमा एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ
- शासन और प्रबंधन स्तर पर सकारात्मक संवाद स्थापित होना
- नियमितीकरण एवं समायोजन की मांग पर प्राथमिकता से विचार का आश्वासन
संघ का कहना है कि वह भविष्य में भी कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर शासन और प्रबंधन के साथ संवाद बनाए रखेगा तथा यदि आवश्यक हुआ तो आगे की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी।



