चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में जेंडर संबंधी विसंगति सामने आने के बाद मतदाता डेटा के सत्यापन पर सवाल उठे हैं। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के रिकॉर्ड में अन्य त्रुटियों की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है।
रायपुर। बीरगांव नगर निगम क्षेत्र की मतदाता सूची में पूर्व महापौर अंबिका यदु के जेंडर कॉलम में महिला की जगह पुरुष दर्ज होने की खबर सामने आई है। 24 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में इस विसंगति को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग के डिजिटल रिकॉर्ड के सत्यापन से जोड़कर सवाल उठाए गए हैं।
पूर्व महापौर के रिकॉर्ड में सामने आई त्रुटि
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के पोर्टल और मतदाता सूची में अंबिका यदु के जेंडर संबंधी विवरण में गलती पाई गई। एक पूर्व जनप्रतिनिधि के रिकॉर्ड में इस तरह की त्रुटि सामने आने से यह सवाल उठा है कि मतदाता सूची तैयार करने और सत्यापित करने की प्रक्रिया में जानकारी का मिलान किस तरह किया गया।
प्रकाशित खबर में कांग्रेस और भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के नाम और तस्वीरों के मिलान में भी गड़बड़ियों की शिकायतों का उल्लेख है। हालांकि, इन सभी मामलों की संख्या या आधिकारिक जांच का कोई समेकित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे व्यापक स्तर की प्रमाणित गड़बड़ी बताने के बजाय सामने आई शिकायतों और रिकॉर्ड संबंधी विसंगतियों के रूप में देखा जाना चाहिए।
SIR सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता विवरणों की जांच और अद्यतन का उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना है। ऐसे में जेंडर, नाम, फोटो या पते से जुड़ी गलतियां सामने आने पर सुधार की प्रक्रिया, शिकायत दर्ज करने का तरीका और अंतिम सत्यापन की जिम्मेदारी स्पष्ट होना जरूरी है।
इस मामले में अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित रिकॉर्ड को सुधारने के लिए आवेदन दिया गया है या नहीं, स्थानीय निर्वाचन कार्यालय ने त्रुटि की जांच शुरू की है या नहीं, और ऐसी अन्य शिकायतों के निपटारे के लिए क्या व्यवस्था अपनाई जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट में संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
मतदाता रिकॉर्ड में सुधार क्यों जरूरी
मतदाता सूची में किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़ी गलती मतदान के दिन भ्रम पैदा कर सकती है और नागरिकों को अपने रिकॉर्ड में सुधार के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। मतदाताओं को अपने विवरणों की जांच करनी चाहिए और त्रुटि मिलने पर निर्वाचन आयोग के निर्धारित माध्यम से सुधार का अनुरोध करना चाहिए।
यह मामला स्थानीय मतदाता डेटा की सटीकता और SIR के बाद किए गए सत्यापन पर सार्वजनिक जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है। प्रकाशित विवरण के अनुसार, अभी मुख्य सवाल यह है कि रिकॉर्ड में त्रुटि कैसे दर्ज हुई और इसे कब तक सुधारा जाएगा।



