
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की महापरिषद की 93वीं बैठक 29 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित निगम मुख्यालय में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया।
बैठक में सहकारी क्षेत्र की वित्तीय और संस्थागत उपलब्धियों, सहकारी संस्थाओं के लिए वित्तपोषण बढ़ाने, नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के विकास तथा किसानों और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
मार्कफेड अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी ने सहकारी क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुए बदलावों और NCDC की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए राज्य स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित किया।
NCDC की वित्तीय उपलब्धियां
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से 25 अक्टूबर 2026 तक NCDC ने देशभर की सहकारी संस्थाओं को कुल 4,14,586 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की। वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने 1,55,408 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी और 1,27,596 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की। इसी वित्त वर्ष में NCDC ने 1,475 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। निगम की ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत रही और नेट एनपीए शून्य दर्ज किया गया।
वित्त वर्ष 2020-21 में NCDC का वार्षिक वित्तीय संवितरण 24,733 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,27,596 करोड़ रुपये हो गया। निगम के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 3,339 इकाइयों और परियोजनाओं से 14,881 सहकारी समितियों को लाभ पहुंचाने का प्रावधान किया गया।
सहकारी संस्थाओं के लिए नई योजनाओं पर जोर
बैठक में सहकारी संस्थाओं के वित्तपोषण के नए माध्यम, संस्थागत भागीदारी और पूंजी जुटाने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई। सहकारी क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ‘सहकार नवाचार योजना’ के तहत पात्र सहकारी संस्थाओं को अधिकतम 25 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता देने का प्रावधान है। बैठक में सहकारी संस्थाओं के पेशेवर प्रबंधन, डिजिटल लेखांकन, वित्तीय अनुशासन, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया गया।
बैठक का उद्देश्य सहकारिता आधारित विकास को गति देना और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों, पशुपालकों, मछुआरों, ग्रामीण महिलाओं तथा कमजोर वर्गों की आजीविका को मजबूत करना रहा।
स्रोत: छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR) तथा सहकारिता मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी।



