
गुरुग्राम। सेक्टर-65 स्थित ट्रंप टावर्स दिल्ली-एनसीआर के एक निवासी ने M3M और परिसर के प्रबंधन पर अपने अपार्टमेंट तक सामान्य पहुंच में बाधा डालने का आरोप लगाया है। निवासी वरुण सुहाग ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और संदेशों में दावा किया कि 36वीं मंजिल पर स्थित उनके फ्लैट के लिए लिफ्ट की पहुंच सीमित कर दी गई थी। उन्होंने आगंतुकों, डिलीवरी कर्मचारियों और घरेलू सामान के प्रवेश में भी परेशानी होने की बात कही।
निवासी के आरोप सार्वजनिक होने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। बाद में उन्होंने बताया कि तकनीकी कर्मचारियों के आने के बाद उनकी मंजिल के लिए लिफ्ट की पहुंच बहाल कर दी गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि प्रबंधन ने प्रतिबंध लगाए जाने के कारणों पर विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण दिया या विवाद के सभी पहलू सुलझ गए हैं।
36वीं मंजिल तक लिफ्ट पहुंच को लेकर शिकायत
वरुण सुहाग ने बताया कि वे ट्रंप टावर्स दिल्ली-एनसीआर के अपार्टमेंट नंबर 36C के मालिक हैं। उनका आरोप था कि उनके फ्लैट के लिए लिफ्ट का कॉल बटन निष्क्रिय कर दिया गया था और लिफ्ट बुलाने के लिए उन्हें हेल्पडेस्क से संपर्क करना पड़ता था। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में कई बार 30 से 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था।
ऊंची मंजिल पर स्थित अपार्टमेंट तक पहुंचने के लिए लिफ्ट पर निर्भरता को देखते हुए निवासी ने इसे सामान्य असुविधा से अधिक गंभीर बताया। उनका कहना था कि लिफ्ट की उपलब्धता पर नियंत्रण होने से परिवार के सदस्यों के आने-जाने और आपात स्थिति में बाहर निकलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ये विवरण निवासी के आरोपों पर आधारित हैं; लिफ्ट प्रणाली के रिकॉर्ड या किसी स्वतंत्र जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक जानकारी में उपलब्ध नहीं है।
बुजुर्ग मां और छोटे बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंता
सुहाग ने अपने परिवार की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके साथ बुजुर्ग मां रहती हैं, जिन्हें हृदय संबंधी परेशानी है। परिवार में एक साल का बच्चा भी है। उन्होंने आशंका जताई कि स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में लिफ्ट तक तत्काल पहुंच न होना परेशानी पैदा कर सकता है।
निवासी ने प्रबंधन से हस्तक्षेप करने और परिवार को होने वाली असुविधा दूर करने की मांग की। उपलब्ध रिपोर्टों में किसी वास्तविक चिकित्सा आपातकाल या उससे हुई क्षति की पुष्टि नहीं की गई है।
मेहमानों और डिलीवरी कर्मचारियों के प्रवेश पर भी आरोप
निवासी ने दावा किया कि लिफ्ट की समस्या के अलावा उनके अपार्टमेंट तक पहुंचने वाले लोगों और सामान के प्रवेश में भी बाधाएं आईं। उनके अनुसार, मेहमानों, डिलीवरी कर्मचारियों, निजी वाहनों और घरेलू सामान को लेकर परेशानी हुई। उन्होंने फर्नीचर को फ्लैट में पहुंचाने के दौरान भी समस्या होने का आरोप लगाया।
सुहाग के अनुसार, उन्होंने प्रबंधन से ईमेल के जरिए स्पष्टीकरण मांगने की कोशिश की। उनके दावे के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि यह प्रबंधन का निर्णय था। हालांकि, सार्वजनिक जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि हर प्रतिबंध किस परिस्थिति में लगाया गया, उसका लिखित आधार क्या था या प्रबंधन ने कौन-से नियम बताए थे।
कब्जे और निर्माण कार्य को लेकर सवाल
सुहाग ने कहा कि उन्हें अपार्टमेंट का कब्जा 27 अगस्त 2026 को मिला था। उन्होंने आरोप लगाया कि भवन में निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद कब्जा दिया गया। उन्होंने परियोजना के ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और कंप्लीशन सर्टिफिकेट को लेकर भी सवाल उठाए।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित प्रमाणपत्रों, स्वीकृत भवन योजना, कब्जा पत्र और सरकारी रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रमाणपत्र गलत तरीके से जारी किए गए थे।
निवासी ने परियोजना में देरी के संबंध में RERA के समक्ष मामला उठाने की बात भी कही। उनके अनुसार, परियोजना दिसंबर 2024 तक पूरी होनी थी, जबकि उन्हें बाद में कब्जा मिला। वास्तविक समय-सीमा, बिक्री समझौते और संबंधित RERA रिकॉर्ड की जांच से ही इस दावे की पुष्टि हो सकती है।
पुलिस और प्रबंधन की भूमिका
सुहाग ने अपनी शिकायत सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय और पुलिस अधिकारियों को टैग किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। मीडिया रिपोर्टों में एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा गया कि विवाद में कब्जे और रखरखाव शुल्क से संबंधित मुद्दे भी बताए गए थे और पुलिस की भूमिका सीमित थी।
यह पुलिस अधिकारी के हवाले से प्रकाशित प्रतिक्रिया है। संबंधित शिकायत, भुगतान रिकॉर्ड और कब्जे की कानूनी स्थिति की स्वतंत्र जांच के बिना इसे किसी पक्ष के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
M3M का पक्ष
इस विवाद पर कंपनी की विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। इसलिए लिफ्ट की पहुंच, आगंतुकों के प्रवेश, रखरखाव शुल्क, कब्जे और प्रमाणपत्रों से जुड़े प्रश्नों पर कंपनी का लिखित पक्ष प्राप्त करना आवश्यक है।
निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए कंपनी से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या अपार्टमेंट नंबर 36C की लिफ्ट पहुंच पर कोई प्रतिबंध लगाया गया था, यदि हां तो किस नियम और किस अधिकारी के निर्देश पर; क्या निवासी पर रखरखाव शुल्क बकाया था; और क्या कब्जे या RERA से संबंधित कोई विवाद लंबित है।
लिफ्ट सेवा बहाल होने की जानकारी
निवासी ने बाद में सोशल मीडिया पर बताया कि तकनीकी कर्मचारियों को भेजे जाने के बाद उनकी मंजिल के लिए लिफ्ट की पहुंच बहाल कर दी गई। इससे शिकायत का तत्काल पहलू सुलझा हुआ दिखाई देता है, लेकिन इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि प्रवेश, रखरखाव शुल्क, कब्जे या RERA से जुड़े अन्य मुद्दे भी समाप्त हो गए हैं।
लग्जरी आवासीय परिसरों में निवासी अधिकारों का सवाल
यह विवाद ऊंची इमारतों में लिफ्ट, सुरक्षा, प्रवेश नियंत्रण और साझा सुविधाओं के प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले निवासियों के लिए लिफ्ट केवल सुविधा नहीं, बल्कि दैनिक आवागमन का आवश्यक साधन है। वहीं, प्रबंधन के पास सुरक्षा और रखरखाव संबंधी नियम लागू करने की जिम्मेदारी भी होती है।
मुख्य प्रश्न यह है कि क्या किसी संविदात्मक या रखरखाव विवाद के कारण निवासी की आवश्यक सेवाओं और सुरक्षित पहुंच को सीमित किया गया था और यदि ऐसा हुआ, तो क्या उस कदम का वैध आधार था। इन प्रश्नों का उत्तर संबंधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही निकाला जा सकता है।
आगे किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?
मामले की स्वतंत्र पड़ताल के लिए बिक्री समझौता, कब्जा पत्र, ऑक्यूपेंसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट, लिफ्ट एक्सेस से संबंधित प्रबंधन के रिकॉर्ड, निवासी और प्रबंधन के बीच ईमेल, रखरखाव शुल्क के बिल, पुलिस शिकायत तथा RERA में दाखिल शिकायत से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्रंप टावर्स के निवासी ने M3M और प्रबंधन पर लिफ्ट तथा प्रवेश सीमित करने के आरोप लगाए हैं। मामला सार्वजनिक होने के बाद लिफ्ट की पहुंच बहाल किए जाने की जानकारी सामने आई। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और कंपनी का विस्तृत पक्ष अभी आवश्यक है।



