दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो को लेकर 21 वर्षीय एलएलबी छात्रा अनामिका उपाध्याय को दुर्ग पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें वीडियो को समाज विशेष की भावनाओं के विरुद्ध आपत्तिजनक बताया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से एक से दो दिन के भीतर जमानत मिल गई।
पुलिस के अनुसार संबंधित वीडियो में छात्रा ने यह कहा था कि भारत का संविधान केवल एक व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि 299 सदस्यीय ड्राफ्टिंग कमेटी द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों का योगदान शामिल था। इस बयान के सामने आने के बाद भिलाई के वैशाली नगर और सुपेला क्षेत्र में कुछ संगठनों ने विरोध दर्ज कराया।
जानकारी के अनुसार अनामिका उपाध्याय अपने परिजन के विवाह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भिलाई आई हुई थीं। इसी दौरान उनका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसके बाद अंबेडकर समर्थक संगठनों और भीम आर्मी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इसे “आपत्तिजनक” और “अपमानजनक” बताते हुए विरोध किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए SC/ST एक्ट तथा अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और छात्रा को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें दुर्ग-भिलाई जेल भेजा गया, जहां से बाद में न्यायालय ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी। फिलहाल वह न्यायिक प्रक्रिया के तहत बाहर हैं और मामले की जांच जारी है।
इस घटना के बाद स्थानीय स्तर के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। एक पक्ष का कहना है कि संबंधित बयान ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित था और इस पर आपराधिक कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बनता है। वहीं दूसरे पक्ष का आरोप है कि वीडियो में की गई टिप्पणी समाज विशेष के सम्मान के खिलाफ थी और इस कारण कानून के तहत कार्रवाई आवश्यक थी।
यह मामला एक बार फिर SC/ST एक्ट के उपयोग और उसके दायरे को लेकर बहस के केंद्र में आ गया है। आंकड़ों के अनुसार इस कानून के तहत दर्ज मामलों में सजा दर अपेक्षाकृत कम रही है, जबकि उच्चतम न्यायालय भी समय-समय पर इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर टिप्पणियां कर चुका है। हालांकि इसके समर्थकों का कहना है कि यह कानून समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और इसकी सख्ती ही इसका प्रभाव है।
पुलिस अधिकारियों की ओर से इस मामले में विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन गिरफ्तारी और जमानत की पुष्टि की गई है। मामले की जांच जारी है और वीडियो की सामग्री, संदर्भ तथा उसके प्रभाव का परीक्षण किया जा रहा है।


