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    गुरुग्राम: 31 एकड़ जमीन के विवाद में M3M के खिलाफ धोखाधड़ी की कार्यवाही बरकरार, ₹450 करोड़ के सौदे पर कानूनी लड़ाई

    Manish ChoudharyBy Manish Choudharyनवम्बर 2, 2026कोई टिप्पणी नहीं2 Views
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    नई दिल्ली/गुरुग्राम। गुरुग्राम के चौमा गांव की करीब 31 एकड़ जमीन से जुड़े लगभग ₹450 करोड़ के विवाद में M3M India Private Limited और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश से संबंधित कार्यवाही जारी रखने का रास्ता साफ हुआ है। दिल्ली की अदालत ने निचली अदालत के आदेश की समीक्षा करते हुए इन आरोपों पर लिए गए संज्ञान में हस्तक्षेप करने से इनकार किया। हालांकि, आपराधिक विश्वासघात से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत संज्ञान को निरस्त कर दिया गया। मामले में अभी किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया गया है।

    नवंबर 2016 के भूमि समझौते से जुड़ा विवाद

    मामले की शुरुआत नवंबर 2016 में हुए भूमि अदला-बदली समझौते से जुड़ी बताई गई है। शिकायतकर्ता MGF Developments Limited के अनुसार, गुरुग्राम के चौमा गांव की जमीन के बदले सोहना क्षेत्र के मोहम्मदपुर गुर्जर गांव में जमीन और ₹114 करोड़ का भुगतान किया जाना था। शिकायत के मुताबिक, शुरुआत में लगभग ₹16.30 करोड़ का भुगतान हुआ, जबकि शेष ₹98 करोड़ के लिए पोस्ट-डेटेड चेक दिए गए थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये चेक भुगतान के लिए प्रस्तुत किए जाने पर अस्वीकृत हो गए और भुगतान रोकने के निर्देश भी दिए गए।

    शिकायतकर्ता का दावा है कि भुगतान संबंधी शर्तें पूरी न होने के बावजूद विवादित जमीन के कुछ हिस्सों का नामांतरण आरोपी कंपनियों के नाम कराया गया। इस घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज, भुगतान की स्थिति और भूमि हस्तांतरण की शर्तें मामले के प्रमुख विवादित पहलू हैं। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।

    ₹450 करोड़ के कथित नुकसान का दावा

    शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि समझौते के अनुरूप भुगतान नहीं होने और जमीन से संबंधित कार्रवाई आगे बढ़ने के कारण उसे करीब ₹450 करोड़ का नुकसान हुआ। यह रकम शिकायत में लगाए गए कथित नुकसान के आकलन से जुड़ी है; इसे अदालत द्वारा अंतिम रूप से तय नुकसान या साबित धोखाधड़ी की राशि नहीं माना जाना चाहिए।

    मामले में जमीन के स्वामित्व, समझौते के पक्षकारों, भुगतान की शर्तों, चेकों की स्थिति और नामांतरण की प्रक्रिया को लेकर विवाद है। आरोपी पक्ष ने इन आरोपों और मामले की व्याख्या पर आपत्ति जताई है।

    अदालत के आदेश में क्या महत्वपूर्ण है?

    निचली अदालत ने 31 जनवरी 2026 को पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र के आधार पर विभिन्न अपराधों का संज्ञान लिया था। M3M India, उससे जुड़ी कंपनियों और आरोपियों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल कीं। उनकी ओर से यह तर्क रखा गया कि विवाद की प्रकृति व्यावसायिक और दीवानी है तथा समझौते के पक्षकारों और संबंधित कंपनियों की भूमिका को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    सत्र अदालत ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित संज्ञान में हस्तक्षेप नहीं किया। इसका अर्थ है कि इन आरोपों पर निचली अदालत में कार्यवाही आगे बढ़ सकती है। यह दोषसिद्धि नहीं है। संज्ञान के चरण पर अदालत यह देखती है कि कार्यवाही जारी रखने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं; आरोपों की अंतिम सत्यता का फैसला बाद की न्यायिक प्रक्रिया में होता है।

    धारा 406 के तहत संज्ञान निरस्त

    आदेश का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारतीय दंड संहिता की धारा 406 से जुड़ा है, जो आपराधिक विश्वासघात की सजा से संबंधित थी। अदालत ने माना कि उपलब्ध आरोपों के आधार पर इस अपराध के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होते। इसलिए इस धारा के तहत निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को निरस्त कर दिया गया।

    यह आरोपी पक्ष को मिली महत्वपूर्ण राहत है, लेकिन इससे पूरा मामला समाप्त नहीं हुआ, क्योंकि धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों पर कार्यवाही जारी रहने दी गई है।

    M3M का पक्ष

    M3M India की ओर से जारी प्रतिक्रिया में कहा गया कि आदेश की कुछ मीडिया व्याख्याओं में घटनाक्रम को कंपनी के लिए झटके के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि कंपनी के अनुसार अदालत ने आपराधिक विश्वासघात के आरोप को निरस्त किया है और अन्य आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। कंपनी का पक्ष रहा है कि विवाद व्यावसायिक प्रकृति का है और वह न्यायिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रखेगी। कंपनी ने भूमि अदला-बदली के दस्तावेजों तथा संबंधित कंपनियों की भूमिका के बारे में भी अपनी आपत्तियां रखी हैं।

    कंपनी ने यह भी कहा कि भुगतान से जुड़ी राशि और संबंधित विवाद दीवानी कार्यवाही में विचाराधीन हैं। इन दावों का अंतिम मूल्यांकन संबंधित दस्तावेजों और अदालत के समक्ष रखे गए साक्ष्यों के आधार पर होगा।

    अब आगे क्या होगा?

    आगे की कार्यवाही में निचली अदालत यह विचार करेगी कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोप तय किए जाने चाहिए या आरोपियों को आरोपमुक्त किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों को अपने कानूनी तर्क और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। भूमि समझौते, भुगतान रिकॉर्ड, चेकों की स्थिति और नामांतरण से जुड़े दस्तावेज मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

    रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए क्यों अहम है मामला?

    यह विवाद बड़े भूमि लेनदेन में भुगतान की शर्तों, स्वामित्व हस्तांतरण और विकास संबंधी अनुमतियों के महत्व को रेखांकित करता है। हालांकि, किसी एक मामले के आधार पर कंपनी की सभी परियोजनाओं या पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस मामले में आरोपों की सत्यता और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत की प्रक्रिया से ही होगा।

    फिलहाल स्थिति यह है कि करीब ₹450 करोड़ के कथित भूमि विवाद में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित कार्यवाही जारी रह सकती है, जबकि आपराधिक विश्वासघात के आरोप पर संज्ञान निरस्त किया गया है। मामले में अंतिम दोषसिद्धि नहीं हुई है।

    M3M Group
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    Manish Choudhary
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    Manish is a media professional and investigative reporter with Chhattisgarh Samachar, specializing in civic-impact journalism and technical troubleshooting. Known for his persistent, evidence-driven approach, he transforms local challenges into stories that empower the public. His work blends sharp analysis with SEO-optimized content, making complex issues instantly shareable across platforms. Whether exposing inefficiencies in service platforms or decoding regulatory compliance, Manish benchmarks every output for legitimacy, engagement, and accountability.

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