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    Home»NEWS»Chhattisgarh»Zepto IPO: ₹22,624 करोड़ की बिक्री, ₹5,905 करोड़ का घाटा; निवेशकों को क्या समझना चाहिए?
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    Zepto IPO: ₹22,624 करोड़ की बिक्री, ₹5,905 करोड़ का घाटा; निवेशकों को क्या समझना चाहिए?

    हजारों करोड़ के राजस्व के बावजूद भारी घाटा, शुरुआती निवेशकों की आंशिक निकासी और लाभप्रदता को लेकर उठ रहे सवाल
    Manish ChoudharyBy Manish Choudharyजून 18, 2026कोई टिप्पणी नहीं1 Views
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    क्विक-कॉमर्स संचालन केंद्र में ऑर्डर तैयार करते कर्मचारी
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    भारत के क्विक-कॉमर्स सेक्टर में Zepto सबसे तेजी से उभरने वाली कंपनियों में शामिल है। कुछ ही वर्षों में कंपनी ने देश के कई बड़े शहरों में अपना नेटवर्क खड़ा किया है और मिनटों में डिलीवरी के मॉडल को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब कंपनी शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। लेकिन प्रस्तावित IPO से पहले उसके वित्तीय आंकड़े और निवेशकों के लिए इससे जुड़े सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    कंपनी के अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) के अनुसार, FY26 में Zepto ने परिचालन से ₹22,624 करोड़ का राजस्व दर्ज किया। यह आंकड़ा कंपनी की तेज़ वृद्धि को दर्शाता है और उसे भारत की सबसे तेजी से बढ़ती उपभोक्ता इंटरनेट कंपनियों में शामिल करता है।

    हालांकि इसी अवधि में कंपनी ने ₹5,905 करोड़ का शुद्ध घाटा भी दर्ज किया। यही वह आंकड़ा है जिस पर बाजार के कई विश्लेषकों और निवेशकों की नजर टिकी हुई है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि कंपनी का कारोबार इतनी तेजी से बढ़ रहा है तो अभी तक लाभप्रदता क्यों हासिल नहीं हो सकी।

    कंपनी का तर्क है कि वर्तमान खर्चों का बड़ा हिस्सा विस्तार योजनाओं, डार्क स्टोर नेटवर्क के विस्तार, तकनीकी निवेश, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राहक अधिग्रहण पर किया जा रहा है। स्टार्टअप जगत में यह रणनीति नई नहीं मानी जाती, लेकिन सार्वजनिक बाजार में सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों के लिए लाभप्रदता की दिशा में स्पष्ट रोडमैप को निवेशक अधिक महत्व देते हैं।

    IPO का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू ऑफर फॉर सेल (OFS) है। UDRHP के अनुसार कंपनी के कुछ शुरुआती निवेशक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने जा रहे हैं। इनमें कई वेंचर कैपिटल और संस्थागत निवेशक शामिल हैं, जिन्होंने शुरुआती चरण में बेहद कम कीमत पर कंपनी में निवेश किया था।

    दस्तावेजों के अनुसार Nexus Ventures VI Holdings द्वारा बेचे जाने वाले शेयरों की औसत अधिग्रहण लागत लगभग ₹3.91 प्रति शेयर रही है। इसी तरह Nexus Ventures VII Holdings, Contrary ZEP Holdings, Razor Ventures Zepto LLC और अन्य निवेशकों ने भी अपेक्षाकृत कम कीमतों पर हिस्सेदारी हासिल की थी। IPO के माध्यम से इन निवेशकों को आंशिक निकासी का अवसर मिलेगा।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वेंचर कैपिटल निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली या आंशिक निकासी असामान्य नहीं है। स्टार्टअप निवेश मॉडल का एक प्रमुख उद्देश्य सफल निकासी (Exit) हासिल करना भी होता है। हालांकि सार्वजनिक निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि वे कंपनी के विकास के अगले चरण में निवेश कर रहे हैं या शुरुआती निवेशकों को तरलता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं।

    Zepto की आय को समझने के लिए केवल कुल राजस्व को देखना पर्याप्त नहीं माना जाता। क्विक-कॉमर्स मॉडल में बड़ी मात्रा में उत्पादों की बिक्री होती है, लेकिन प्रत्येक लेनदेन पर कंपनी को सीमित मार्जिन मिलता है। ऐसे में अनुभवी निवेशक कुल बिक्री के बजाय ग्रॉस प्रॉफिट, यूनिट इकॉनॉमिक्स, योगदान मार्जिन, नकदी प्रवाह और लाभप्रदता की दिशा पर अधिक ध्यान देते हैं।

    कंपनी देशभर में 1,100 से अधिक डार्क स्टोर संचालित करने का दावा करती है। यह नेटवर्क निश्चित रूप से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान कर सकता है, लेकिन इसके साथ किराया, स्टाफ, इन्वेंट्री, बिजली, तकनीक और डिलीवरी लागत जैसे स्थायी खर्च भी जुड़े रहते हैं। इसलिए केवल स्टोरों की संख्या के आधार पर भविष्य की लाभप्रदता का अनुमान लगाना आसान नहीं है।

    UDRHP में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। कंपनी SEBI के ICDR विनियमों की Regulation 6(2) के तहत IPO ला रही है क्योंकि वह Regulation 6(1)(a) और 6(1)(b) में निर्धारित पारंपरिक लाभप्रदता मानदंडों को पूरा नहीं करती। इसका अर्थ यह नहीं है कि कंपनी सार्वजनिक बाजार में नहीं आ सकती, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि निवेशक फिलहाल एक लाभप्रद व्यवसाय में नहीं, बल्कि भविष्य में लाभप्रद बनने की संभावना वाले व्यवसाय में निवेश करने पर विचार कर रहे हैं।

    यही वजह है कि Zepto IPO को केवल एक कंपनी की लिस्टिंग नहीं बल्कि भारत के पूरे क्विक-कॉमर्स मॉडल की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। निजी निवेशक अक्सर भविष्य की संभावनाओं, बाजार हिस्सेदारी और तेज़ वृद्धि के आधार पर मूल्यांकन करते हैं। इसके विपरीत सार्वजनिक बाजार लंबे समय में लाभ, नकदी प्रवाह और पूंजी पर प्रतिफल को अधिक महत्व देते हैं।

    Zepto ने कम समय में प्रभावशाली विस्तार किया है और भारतीय क्विक-कॉमर्स उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। लेकिन कंपनी के अपने वित्तीय दस्तावेजों में दर्ज आंकड़े निवेशकों के सामने कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न भी रखते हैं। FY26 में ₹22,624 करोड़ का राजस्व, ₹5,905 करोड़ का घाटा, शुरुआती निवेशकों की आंशिक निकासी और लाभप्रदता की स्पष्ट चुनौती ऐसे मुद्दे हैं जिन पर निवेशकों को निर्णय लेने से पहले गंभीरता से विचार करना होगा।

    अंततः सवाल यह नहीं है कि Zepto ने बड़ा कारोबार खड़ा किया है या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या यह कारोबार आने वाले वर्षों में स्थायी मुनाफे में बदल पाएगा, या फिर सार्वजनिक निवेशकों से उस भविष्य पर भरोसा करने को कहा जा रहा है जिसकी कीमत शुरुआती निवेशक पहले ही वसूल करना शुरू कर चुके हैं।

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    Manish Choudhary
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    Manish is a media professional and investigative reporter with Chhattisgarh Samachar, specializing in civic-impact journalism and technical troubleshooting. Known for his persistent, evidence-driven approach, he transforms local challenges into stories that empower the public. His work blends sharp analysis with SEO-optimized content, making complex issues instantly shareable across platforms. Whether exposing inefficiencies in service platforms or decoding regulatory compliance, Manish benchmarks every output for legitimacy, engagement, and accountability.

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    By Manish Choudharyनवम्बर 4, 20261

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