मुंबई। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों से निजी वित्त कंपनियों, बैंकों और डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म के जरिए कर्ज लेने वाले किसानों तथा ग्रामीण परिवारों पर वसूली के दबाव की शिकायतें सामने आ रही हैं। नांदेड़ में एक किसान की वित्त कंपनी के कार्यालय में मौत के मामले में पुलिस ने हत्या, अपहरण और गैरकानूनी बंधक बनाने से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की है। 29 अक्टूबर तक इस मामले में नौ लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। लातूर में एक खेती-मजदूर की आत्महत्या के बाद उसकी पत्नी की शिकायत पर चार वित्तीय संस्थानों और एक लोन ऐप से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। वहीं, कंधार और अकोला से घर पहुंचकर वसूली करने, परिवार के सदस्यों की तस्वीरें लेने और किस्तों के भुगतान के लिए दबाव बनाने की शिकायतें सामने आई हैं।
इन घटनाओं में शिकायतों और पुलिस की कार्रवाई को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी FIR में कंपनी या उसके कर्मचारियों का नाम आने का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी या उसके वरिष्ठ प्रबंधन को अदालत ने दोषी ठहरा दिया है। कई मामलों में जांच जारी है और कुछ शिकायतों में संबंधित वित्तीय संस्था का नाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
लातूर: चार वित्तीय संस्थानों और RING ऐप का नाम FIR में
लातूर जिले के शिरूर अनंतपाल तालुका के रानी अंकुलेगा गांव में 26 अक्टूबर 2026 को दत्तात्रय सूर्यकांत कुंभार की उनके घर में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, वह खेती-मजदूरी करते थे और उनके परिवार में पत्नी तथा दो बच्चे हैं। उनके पास से एक हस्तलिखित नोट मिलने की बात सामने आई, जिसमें चार वित्तीय संस्थानों के नाम और कर्ज चुकाने में असमर्थता का उल्लेख था।
कुंभार की पत्नी सविता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 30 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया। यह धारा आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण से संबंधित है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कर्ज की किस्तों के भुगतान को लेकर बार-बार फोन किए गए और मानसिक दबाव बनाया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि कुंभार की मौत के बाद भी भुगतान के लिए फोन आते रहे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है।
इस प्रकरण में रिपोर्टों में जिन चार नामों का उल्लेख किया गया है, वे हैं Equitas Bank, Shriram Finance, HDB Financial Services और RING लोन ऐप। नीचे दिए गए लोगो केवल रिपोर्टों में उल्लिखित संस्थाओं और प्लेटफॉर्म की पहचान के लिए हैं। इनका प्रदर्शन किसी संस्था के विरुद्ध आरोप सिद्ध होने का संकेत नहीं है।
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| Equitas Small Finance Bank | Shriram Finance |
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| HDB Financial Services | RING by Kissht / OnEMI platform |
यहां एक जरूरी अंतर है: ये चारों एक ही प्रकार की संस्था नहीं हैं। Equitas एक स्मॉल फाइनेंस बैंक है, Shriram Finance और HDB Financial Services NBFC हैं, जबकि RING एक डिजिटल क्रेडिट प्लेटफॉर्म है। RING का संचालन OnEMI Technology Solutions Limited करती है। उसके आधिकारिक ऐप विवरण में Si-Creva Capital Services, Northern Arc, MAS Financial Services और Utkarsh Small Finance Bank जैसे ऋणदाता साझेदारों का उल्लेख है। इसलिए कुंभार के मामले में वास्तविक ऋणदाता की पहचान उसके लोन एग्रीमेंट, स्वीकृति पत्र और बैंक खाते में आई रकम के रिकॉर्ड से ही पक्की होगी। केवल ऐप का नाम सामने आने से यह तय नहीं होता कि कर्ज किस NBFC या बैंक ने दिया था।
पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रत्येक कर्ज की राशि कितनी थी, किस संस्था ने किस तारीख को कर्ज दिया, किसने रिकवरी कॉल किए और शिकायत में नामित व्यक्तियों की वास्तविक भूमिका क्या थी। उपलब्ध पुलिस विवरण में कुल कर्ज की रकम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
नांदेड़: आठ हजार रुपये के कर्ज के बाद वित्त कंपनी के कार्यालय में किसान की मौत
नांदेड़ जिले के मुदखेड़ तालुका के मालकोठा गांव निवासी 40 वर्षीय किसान चंद्रकांत दगडूजी शिंदे की 24 अक्टूबर को नांदेड़ शहर में एक निजी वित्त कंपनी के कार्यालय में मौत हो गई। पुलिस और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सितंबर में लगभग ₹8,000 का कर्ज लिया था और बकाया किस्तों सहित लगभग ₹10,000 की रकम चुकानी थी।
शिंदे की पत्नी ज्योति की शिकायत के मुताबिक, 22 अक्टूबर को दो व्यक्ति उन्हें गांव से मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गए। परिवार का आरोप है कि उन्हें वित्त कंपनी के कार्यालय में रखा गया, वहां बंधक बनाया गया और मारपीट की गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि करीब ₹10,000 के बकाये के बदले उनसे ₹70,000 तक की मांग की जा रही थी। यह रकम परिवार की ओर से लगाया गया आरोप है; पुलिस जांच में इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। परिवार के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि शिंदे की मौत को आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश हुई और उनके शरीर को कार्यालय में लटकाया गया; पुलिस इस आरोप और मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। यह रकम परिवार की ओर से लगाया गया आरोप है; पुलिस जांच में इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
शिंदे का शव KF Enterprises नाम से पहचाने गए निजी वित्त कार्यालय में मिला। वजीराबाद पुलिस ने हत्या, अपहरण और गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच दल (SIT) बनाया गया। 29 अक्टूबर तक नौ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई थी। जांच का मुख्य सवाल यह है कि शिंदे को कार्यालय तक किसने पहुंचाया, वहां उनके साथ क्या हुआ और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।
नांदेड़ में इसी अवधि में सामने आए एक अन्य मामले में मुदखेड़ के दत्ता किसान गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि ₹8,000 के कर्ज की वसूली को लेकर उन्हें 6 अक्टूबर को कथित तौर पर पीटा गया, वित्त कंपनी के कार्यालय ले जाया गया और बाद में जान से मारने की धमकी दी गई। इस शिकायत में Khalsa Finance का नाम सामने आया। पुलिस ने अपहरण और मारपीट के आरोपों में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
यहां KF Enterprises, Khalsa Finance और Kuberphal Credit Society के नाम अलग-अलग पुलिस तथा समाचार विवरणों में आए हैं। कुछ गिरफ्तार व्यक्तियों को वित्त कारोबार से जुड़ा बताया गया है, जबकि एक व्यक्ति को Kuberphal Credit Society का सचिव बताया गया। उपलब्ध जानकारी से इन संस्थाओं के बीच स्वामित्व या कानूनी संबंध स्थापित नहीं होता। इसलिए इन्हें एक ही कंपनी या एक ही कानूनी इकाई मानना उचित नहीं होगा।
कंधार: 24 में से 11 किस्तें चुकाने के बाद भी घर पहुंचा रिकवरी प्रतिनिधि
नांदेड़ जिले के कंधार तालुका के चिखली गांव में 29 अक्टूबर को एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी के रिकवरी प्रतिनिधि के किसान विठ्ठल कदम के घर पहुंचने की शिकायत सामने आई। प्रकाशित विवरण के अनुसार, कदम ने कुल 24 किस्तों में से 11 किस्तें चुका दी थीं। शेष किस्तों का भुगतान फसल और आमदनी से जुड़ी कठिनाइयों के कारण अटका हुआ था।
आरोप है कि कंपनी का प्रतिनिधि सीधे उनके घर पहुंचा और आंगन में बैठकर भुगतान के लिए दबाव बनाने लगा। घटना का वीडियो भी सामने आया। किसान संगठन के एक पदाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर प्रतिनिधि से सवाल किए और उसे वहां से जाने को कहा। सार्वजनिक विवरण में संबंधित माइक्रोफाइनेंस कंपनी का नाम स्पष्ट नहीं किया गया है। इसलिए किसी दूसरी कंपनी का नाम इस घटना से जोड़ना सही नहीं होगा।
यह मामला इस सवाल को सामने लाता है कि क्या वसूली प्रतिनिधि ने कर्ज समझौते में तय प्रक्रिया, निर्धारित संपर्क स्थान और कंपनी की आचार संहिता का पालन किया था। इन बातों की पुष्टि के लिए कर्जदार का ऋण समझौता, वसूली नोटिस, एजेंट का प्राधिकरण पत्र और कंपनी का रिकॉर्ड जरूरी होगा।
अकोला: ₹50 हजार के कर्ज में ₹30 हजार लौटाए, पत्नी की तस्वीर लेने का आरोप
अकोला जिले के डोंगरगांव के अल्पभूधारक किसान योगेश नागपुरे ने आरोप लगाया कि एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधि बार-बार उनके घर पहुंचकर कर्ज चुकाने का दबाव बना रहे थे। नागपुरे के अनुसार, उन्होंने ₹50,000 का कर्ज लिया था और उसमें से ₹30,000 चुका दिए थे। उनका कहना था कि फसल खराब होने से आमदनी प्रभावित हुई, लेकिन वह शेष रकम चुकाने के लिए तैयार थे।
किसान का आरोप है कि वसूली के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों ने उनकी पत्नी की तस्वीर बिना सहमति के ली। उन्होंने सवाल उठाया कि तस्वीर किस उद्देश्य से ली गई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाना था। उपलब्ध रिपोर्टों में संबंधित कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर कहा था कि उन्हें इस संबंध में सरकार के निर्देश की जानकारी नहीं मिली थी और विस्तृत जानकारी मुख्यालय से मिल सकती है। इस प्रकरण में कंपनी की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रिपोर्टों में दर्ज नहीं है।
महाराष्ट्र सरकार ने क्या निर्देश दिए?
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति की समीक्षा के लिए 30 सितंबर 2026 को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट उपसमिति की बैठक में बैंकों और क्रेडिट सोसायटियों को सूखा प्रभावित किसानों के घर जाकर फसल ऋण की वसूली नहीं करने के निर्देश दिए गए। जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया। मुख्य सचिव से यह भी जांचने को कहा गया कि क्या इस विषय में भारतीय रिजर्व बैंक से अलग परिपत्र जारी कराने का अनुरोध किया जा सकता है।
14 अक्टूबर को राजस्व मंत्री ने अकोला और मराठवाड़ा से आई जबरन वसूली की शिकायतों पर कहा कि सूखा प्रभावित किसानों पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए और कलेक्टरों को संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि माइक्रोफाइनेंस और वित्त कंपनियों को कर्ज वसूली के लिए किसानों को एक भी फोन नहीं करना चाहिए। यह मंत्री का सार्वजनिक निर्देश/चेतावनी थी; इसे RBI का अलग परिपत्र या सभी ऋणों पर स्वतः लागू स्थगन नहीं माना जाना चाहिए। 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को धमकाने, बल प्रयोग करने या परेशान करने की शिकायत मिलने पर उसे दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
इन सरकारी बयानों और निर्देशों को पूर्ण कर्जमाफी या RBI की ओर से जारी पूरे राज्य में ऋण-वसूली पर रोक के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। 30 सितंबर की बैठक में RBI से संभावित परिपत्र की संभावना की जांच करने को कहा गया था। उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई राज्यव्यापी RBI आदेश सामने नहीं आया है जो सभी प्रकार के कर्ज की किस्तों को स्वतः स्थगित करता हो।
RBI के माइक्रोफाइनेंस नियम वसूली के बारे में क्या कहते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक के 14 मार्च 2022 के माइक्रोफाइनेंस ऋण संबंधी निर्देशों में वसूली की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। इन नियमों के अनुसार, ऋणदाता संस्था को ऐसे कर्जदारों की पहचान करने की व्यवस्था रखनी चाहिए जिन्हें भुगतान में कठिनाई हो रही है, उनसे संवाद करना चाहिए और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी देनी चाहिए।
नियमों के अनुसार, वसूली सामान्यतः ऋणदाता और उधारकर्ता की सहमति से तय किए गए निर्धारित या केंद्रीय स्थान पर की जानी चाहिए। रिकवरी कर्मचारी को उधारकर्ता के घर या काम की जगह पर जाने की अनुमति तब दी जा सकती है, जब उधारकर्ता लगातार दो या उससे अधिक बार तय स्थान पर उपस्थित नहीं होता। इसलिए घर पर हर बार पहुंचकर वसूली करना स्वतः अधिकृत प्रक्रिया नहीं है; यह देखना होगा कि निर्धारित शर्त पूरी हुई थी या नहीं।
RBI ने माइक्रोफाइनेंस कर्ज की वसूली में कठोर तरीकों को प्रतिबंधित किया है। इनमें धमकी या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल, बार-बार फोन करना, सुबह 9 बजे से पहले या शाम 6 बजे के बाद बकाया वसूली के लिए कॉल करना, रिश्तेदारों-दोस्तों-सहकर्मियों को परेशान करना, कर्जदार का नाम सार्वजनिक करना, हिंसा या हिंसा की धमकी देना और बकाया राशि या भुगतान न करने के परिणामों के बारे में भ्रामक जानकारी देना शामिल है।
वित्तीय संस्था को वसूली संबंधी शिकायतों के समाधान की व्यवस्था भी रखनी होती है। यदि वसूली का काम किसी बाहरी एजेंसी या ठेकेदार को सौंपा गया है, तब भी विनियमित संस्था अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं होती। उसे एजेंटों की जांच, प्रशिक्षण और निगरानी करनी होती है तथा उनके अनुचित व्यवहार के लिए जवाबदेही तय करनी होती है।
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि RBI के ये विशेष प्रावधान केवल उन ऋणों पर लागू होते हैं जो नियमों के अनुसार माइक्रोफाइनेंस ऋण की श्रेणी में आते हैं। Equitas जैसे बैंक, Shriram Finance और HDB Financial Services जैसे NBFC तथा RING जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के हर उत्पाद को बिना ऋण समझौता देखे माइक्रोफाइनेंस ऋण नहीं कहा जा सकता। संबंधित ऋण की प्रकृति, वास्तविक ऋणदाता और रिकवरी व्यवस्था की पहचान दस्तावेजों से करनी होगी।
वसूली एजेंट की जवाबदेही किसकी?
कर्ज वसूली का काम किसी बाहरी एजेंसी को सौंपा जाना आम बात है। लेकिन RBI के निर्देशों के अनुसार, विनियमित बैंक या NBFC की जिम्मेदारी केवल इसलिए समाप्त नहीं हो जाती कि वसूली करने वाला व्यक्ति उसका सीधा कर्मचारी नहीं है। ऋणदाता को एजेंट के व्यवहार पर नियंत्रण, प्रशिक्षण, पहचान सत्यापन और शिकायत निवारण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है।
किसी भी विवाद में यह पता करना जरूरी है कि वसूली प्रतिनिधि किस संस्था की ओर से आया था, उसके पास अधिकृत पत्र था या नहीं, वह किस वसूली एजेंसी से जुड़ा था, किस खाते की वसूली कर रहा था और क्या उसके व्यवहार की शिकायत कंपनी के पास दर्ज हुई थी। RING जैसे ऐप के मामले में यह भी देखना जरूरी है कि ऐप चलाने वाली कंपनी के अलावा ऋण समझौते में वास्तविक ऋणदाता कौन है।
किसानों और परिवारों के लिए शिकायत का रास्ता
किसान या उधारकर्ता को वसूली एजेंट की ओर से धमकी, मारपीट, जबरन ले जाने, परिवार को परेशान करने या निजी तस्वीरें लेने जैसी शिकायत हो तो घटना की तारीख, कॉल रिकॉर्ड, संदेश, भुगतान रसीद, एजेंट का पहचान पत्र, वाहन नंबर और उपलब्ध वीडियो सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। किसी शारीरिक धमकी या जबरदस्ती की स्थिति में स्थानीय पुलिस को शिकायत दी जा सकती है। आपात स्थिति में 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
बैंक या RBI के दायरे में आने वाली वित्तीय संस्था से संबंधित शिकायत में पहले संस्था के आधिकारिक शिकायत निवारण अधिकारी को लिखित शिकायत देना और उसकी प्राप्ति सुरक्षित रखना चाहिए। समाधान नहीं मिलने पर पात्र मामलों में RBI के शिकायत निवारण तंत्र का उपयोग किया जा सकता है। डिजिटल लोन के मामले में ऐप का नाम ही पर्याप्त नहीं होता; लोन एग्रीमेंट में दर्ज ऋणदाता का नाम और शिकायत अधिकारी देखना आवश्यक है।
कंपनियों से जवाबदेही और प्रशासन से निगरानी की मांग
नांदेड़, लातूर, कंधार और अकोला के मामलों में शिकायतों की प्रकृति अलग-अलग है। कहीं परिवार ने अपहरण और मारपीट के आरोप लगाए हैं, कहीं आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का मामला दर्ज हुआ है, तो कहीं घर पहुंचकर दबाव बनाने या परिवार की तस्वीरें लेने की शिकायत है। इन सभी घटनाओं को एक ही कानूनी श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
लातूर मामले में नाम आए Equitas Small Finance Bank, Shriram Finance, HDB Financial Services और RING प्लेटफॉर्म से यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित ऋण किस इकाई ने जारी किया, किसने वसूली की जिम्मेदारी संभाली और शिकायतों के बाद क्या आंतरिक कार्रवाई की गई। नांदेड़ के मामलों में KF Enterprises और Khalsa Finance के नाम अलग-अलग विवरणों में आए हैं; उनकी कानूनी पहचान और आपसी संबंध की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड से की जानी चाहिए। कंधार और अकोला के मामलों में संबंधित कंपनी का नाम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
इस रिपोर्ट में दर्ज आरोप जांच के अधीन हैं। जिन संस्थानों या कर्मचारियों के नाम FIR अथवा शिकायतों में आए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए। किसी कंपनी की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच, नियामकीय कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
सूखे और फसल नुकसान से जूझ रहे परिवारों के लिए कर्ज चुकाना कठिन हो सकता है, लेकिन वसूली की प्रक्रिया कानून और RBI के नियमों के भीतर रहनी चाहिए। कर्ज की वसूली का अधिकार किसी भी संस्था या उसके एजेंट को धमकी, हिंसा, अपमान या परिवार की निजता में दखल देने का अधिकार नहीं देता। महाराष्ट्र में जारी शिकायतों के बाद अब प्रशासनिक निर्देशों के पालन, पुलिस जांच और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही पर निगरानी जरूरी है।







