महासमुंद थाना क्षेत्र में जुए के चार अलग-अलग फड़ों पर पुलिस ने छापामार कार्रवाई करते हुए कुल 30 लोगों को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर 2 नवंबर 2026 को एक साथ कार्रवाई की गई। चारों मामलों में जुआ खेलने के आरोप में पकड़े गए लोगों के पास से नकदी, मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन सहित तीन लाख 87 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई है।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कुल 63,820 रुपये नकद, 11 मोटरसाइकिल और 19 मोबाइल फोन जब्त किए गए। जब्त संपत्ति का कुल मूल्य तीन लाख 87 हजार रुपये से अधिक बताया गया है। कार्रवाई महासमुंद थाना क्षेत्र में संचालित चार जुआ फड़ों को लेकर की गई। पुलिस ने सभी चार मामलों में अलग-अलग कार्रवाई दर्ज की है।
चार मामलों में जुआ प्रतिषेध अधिनियम और बीएनएस के तहत कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, चारों मामलों में छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम की धारा 3(2) के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 112 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 112 को छोटे संगठित अपराध से संबंधित प्रावधान के रूप में लागू किया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
कार्रवाई के बाद जारी तस्वीर ने खड़े किए सवाल
इस कार्रवाई के साथ सामने आई पुलिस की तस्वीर ने एक अलग और गंभीर सवाल खड़ा किया है। तस्वीर में पकड़े गए कई लोग पुलिस थाने के भीतर केवल अंडरवियर में या बिना शर्ट के खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनके साथ पुलिसकर्मी भी तस्वीर में मौजूद हैं। आरोपों की जांच और कानूनी कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन किसी व्यक्ति को इस तरह अर्धनग्न अवस्था में सार्वजनिक तस्वीर के जरिए प्रदर्शित करना उसकी गरिमा और निजता से जुड़ा प्रश्न है।
किसी व्यक्ति पर जुआ खेलने का आरोप लगना उसे अपमानित करने का अधिकार पुलिस को नहीं देता। गिरफ्तारी या हिरासत का उद्देश्य कानून के तहत जांच और कार्रवाई करना है, न कि आरोपितों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना। पुलिस की ओर से जारी या प्रसारित ऐसी तस्वीरों में यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या संबंधित लोगों को इसी अवस्था में रखा गया था, वे किस परिस्थिति में इस स्थिति में पहुंचे और तस्वीर लेने तथा सार्वजनिक करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। उपलब्ध तस्वीर मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि लोगों के कपड़े पुलिस ने उतरवाए थे, लेकिन तस्वीर में दिखाई दे रही स्थिति की जवाबदेही और स्पष्टीकरण जरूरी है।
अपराध पर कार्रवाई के साथ गरिमा की रक्षा भी जरूरी
पुलिस को जुआ जैसे अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करने और कानून के अनुसार आरोपितों को न्यायिक प्रक्रिया के सामने पेश करने का अधिकार है। लेकिन हिरासत में मौजूद व्यक्तियों के साथ व्यवहार में मानवीय गरिमा, निजता और निष्पक्षता का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। किसी की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस तरह की तस्वीरें सार्वजनिक होने से व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत पर भी सवाल उठते हैं।
महासमुंद की इस कार्रवाई में पुलिस ने जब्ती और गिरफ्तारियों का विवरण दिया है, लेकिन तस्वीर में लोगों की अर्धनग्न स्थिति को लेकर कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। कानून का पालन कराने वाली संस्था से अपेक्षा है कि वह कार्रवाई के दौरान भी कानून और मानवीय गरिमा के मानकों का पालन करे। जुए के खिलाफ कार्रवाई की सफलता केवल गिरफ्तारियों और जब्ती से नहीं, बल्कि इस बात से भी आंकी जानी चाहिए कि पूरी प्रक्रिया में लोगों के अधिकारों का सम्मान किया गया या नहीं।



