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    Home»NEWS»रायपुर: एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड आवेदन पर RBI लोकपाल के आदेश को लेकर सवाल, सबूत के बावजूद बैंक की सफाई स्वीकार करने का आरोप
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    रायपुर: एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड आवेदन पर RBI लोकपाल के आदेश को लेकर सवाल, सबूत के बावजूद बैंक की सफाई स्वीकार करने का आरोप

    Manish ChoudharyBy Manish Choudharyअगस्त 27, 2026Updated:अक्टूबर 23, 2026कोई टिप्पणी नहीं3 Views
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    एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड आवेदन मामले में RBI लोकपाल के आदेश और जमा किए गए सबूत पर उठे सवाल
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    रायपुर में एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड आवेदन से जुड़े एक मामले में भारतीय रिजर्व बैंक के लोकपाल कार्यालय के समापन आदेश पर सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ता मनीष कुमार चौधरी का आरोप है कि बैंक ने उनके आवेदन के लंबित रहने की वजह गलत श्रेणी में आवेदन जमा होना बताई, जबकि उन्होंने बैंक और RBI के सामने ऐसा स्क्रीनशॉट प्रस्तुत किया था जिसमें आवेदन प्रक्रिया के दौरान नई या मौजूदा ग्राहक श्रेणी चुनने का कोई विकल्प दिखाई नहीं देता। शिकायतकर्ता का कहना है कि 19 अगस्त 2026 के लोकपाल आदेश में इस स्क्रीनशॉट या उनकी आपत्ति का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

    बैंक ने गलत श्रेणी में आवेदन का दिया था हवाला

    मनीष कुमार चौधरी ने एक्सिस बैंक में क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया था। आवेदन क्रमांक C100000075380995 है। उनका कहना है कि करीब तीन महीने तक आवेदन पर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने RBI लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके जवाब में एक्सिस बैंक ने RBI को बताया कि आवेदन गलती से New to Bank यानी NTB श्रेणी में जमा हुआ था। बैंक की ओर से यह भी बताया गया कि शिकायतकर्ता का पहले से वेतन खाता होने के कारण आवेदन Existing to Bank यानी ETB श्रेणी में होना चाहिए था और इसी वजह से आवेदन आगे नहीं बढ़ सका।

    स्क्रीनशॉट में श्रेणी चुनने का विकल्प नहीं होने का दावा

    शिकायतकर्ता ने बैंक के इस स्पष्टीकरण पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि क्रेडिट कार्ड आवेदन की प्रक्रिया में NTB या ETB चुनने का कोई विकल्प ही उपलब्ध नहीं था।

    उन्होंने इस दावे के समर्थन में आवेदन प्रक्रिया का स्क्रीनशॉट बैंक और RBI को उपलब्ध कराया। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने यह स्क्रीनशॉट 1 अगस्त 2026 को एक्सिस बैंक के नियामकीय डेस्क को भेजा था। बाद में 20 अगस्त 2026 को इसे RBI के केंद्रीय शिकायत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र को भी संलग्नक के रूप में भेजा गया।

    शिकायतकर्ता ने अपनी आपत्ति में सवाल उठाया कि जब आवेदन करते समय ग्राहक को नई या मौजूदा ग्राहक श्रेणी चुनने का विकल्प ही नहीं दिया गया, तो गलत श्रेणी में आवेदन करने की जिम्मेदारी ग्राहक पर कैसे डाली जा सकती है।

    19 अगस्त के आदेश में स्क्रीनशॉट का उल्लेख नहीं

    शिकायतकर्ता के अनुसार, RBI लोकपाल कार्यालय ने 19 अगस्त 2026 के समापन आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता और संबंधित बैंक, दोनों की ओर से दिए गए जवाबों तथा सहायक दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच की गई।

    लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि आदेश में उस स्क्रीनशॉट का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसे उन्होंने बैंक की सफाई पर सवाल उठाने के लिए प्रस्तुत किया था। आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि बैंक के गलत श्रेणी वाले स्पष्टीकरण को किस आधार पर संतोषजनक और उचित माना गया।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके जवाब को आदेश में मुख्य रूप से अधिक मुआवजे की मांग के रूप में दर्ज किया गया, जबकि उनके अनुसार जवाब में बैंक के स्पष्टीकरण की तथ्यात्मक स्थिति पर आपत्ति उठाई गई थी और उसके समर्थन में दस्तावेज भी दिया गया था।

    शिकायतकर्ता ने RBI के भीतर ही उठाया मामला

    मनीष कुमार चौधरी ने 20 अगस्त 2026 को RBI के केंद्रीय शिकायत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र को पत्र भेजकर लोकपाल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि उनके द्वारा प्रस्तुत स्क्रीनशॉट को क्या वास्तव में रिकॉर्ड पर लिया गया था। यदि इसे विचार में लिया गया था, तो बैंक के विपरीत स्पष्टीकरण को स्वीकार करने का आधार क्या था।

    उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि उनकी आपत्ति को केवल अधिक मुआवजे की मांग के रूप में क्यों दर्ज किया गया, जबकि उन्होंने बैंक के जवाब की तथ्यात्मक सत्यता को चुनौती दी थी।

    27 अगस्त को डुप्लीकेट शिकायत का मुद्दा

    शिकायतकर्ता के अनुसार, 27 अगस्त 2026 को RBI के केंद्रीय शिकायत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र की ओर से उनकी शिकायत को प्रक्रियागत रूप से डुप्लीकेट शिकायत माना गया और दोबारा निर्धारित फॉर्म भरने के लिए कहा गया।

    इस पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह मूल क्रेडिट कार्ड शिकायत को दोबारा दर्ज कराने का मामला नहीं है, बल्कि लोकपाल कार्यालय द्वारा मूल शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया और आदेश में उनके प्रस्तुत साक्ष्य के उल्लेख को लेकर अलग शिकायत है।

    सवाल बैंक की सफाई से आगे, शिकायत निवारण प्रक्रिया पर

    इस मामले में मुख्य विवाद अब केवल क्रेडिट कार्ड आवेदन के लंबित रहने तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बैंक की ओर से दी गई वजह और आवेदन प्रक्रिया के स्क्रीनशॉट में स्पष्ट विरोधाभास है।

    वहीं, लोकपाल के समापन आदेश में उस कथित विरोधाभास और प्रस्तुत स्क्रीनशॉट का उल्लेख नहीं होने का दावा शिकायत निवारण प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।

    हालांकि, इस मामले में एक्सिस बैंक या RBI लोकपाल कार्यालय की ओर से इस रिपोर्ट के लिए कोई अलग विस्तृत स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए बैंक की ओर से दिए गए जवाब और लोकपाल के आदेश में दर्ज निष्कर्ष को भी पूरे संदर्भ में देखना आवश्यक होगा।

    नोट: यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए एक्सिस बैंक और RBI को भेजे गए पत्राचार, संलग्न स्क्रीनशॉट तथा RBI लोकपाल के लिखित आदेश में बताए गए तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। संबंधित पक्ष की ओर से कोई अतिरिक्त आधिकारिक स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।

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    Manish Choudhary
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