मुंबई। डोंबिवली स्थित केडीएमसी (कल्याण-डोंबिवली नगर निगम) संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों से कथित मारपीट के मामले में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद महाराष्ट्रभर के डॉक्टरों और चिकित्सा संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया।
पुलिस के अनुसार यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अस्पताल के डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला को उच्च जोखिम वाली स्थिति के कारण दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल में आवश्यक नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) उपलब्ध नहीं होने के कारण यह चिकित्सकीय निर्णय लिया गया था।
आरोप है कि इस निर्णय से नाराज होकर रमेश म्हात्रे अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और कथित रूप से मारपीट की। इस संबंध में पुलिस ने रमेश म्हात्रे समेत कई लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
वायरल सीसीटीवी के बाद हुई कार्रवाई
घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कुछ लोग अस्पताल के आपातकालीन विभाग के भीतर डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ हाथापाई करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और पुलिस ने रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद रमेश म्हात्रे ने स्वास्थ्य संबंधी शिकायत की, जिसके बाद उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया। बाद में आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया।
डॉक्टरों का राज्यव्यापी विरोध
घटना के विरोध में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में डॉक्टरों और चिकित्सा संगठनों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
विरोध प्रदर्शन के कारण शास्त्री नगर अस्पताल में कुछ नियमित स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
आपराधिक मामलों को लेकर फिर उठे सवाल
घटना के बाद रमेश म्हात्रे की पृष्ठभूमि भी चर्चा में आ गई है। सार्वजनिक अभिलेखों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ वर्षों से लगभग 12 आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को चुनावी टिकट दिए जाने को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का अर्थ यह नहीं है कि वह सभी मामलों में दोषी सिद्ध हो चुका है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाता है।
चिकित्सा संगठनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
डॉक्टरों के संगठनों, विपक्षी नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी संरक्षण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।



