भारत के क्विक-कॉमर्स सेक्टर में Zepto ने कुछ ही वर्षों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। मिनटों में किराना और रोजमर्रा की जरूरत का सामान पहुंचाने के मॉडल ने कंपनी को तेजी से विस्तार करने में मदद की है। आज Zepto को इस क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ियों में गिना जाता है और अब कंपनी शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है।
लेकिन IPO से पहले निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल सिर्फ कंपनी की ग्रोथ नहीं, बल्कि उसकी वित्तीय स्थिति को लेकर है।
राजस्व बढ़ा, लेकिन घाटा भी बढ़ता गया
Zepto की वृद्धि को लेकर बाजार में उत्साह है। कंपनी ने कम समय में कई शहरों में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है और ग्राहक आधार में भी तेजी से विस्तार किया है। हालांकि वित्तीय आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि इस विस्तार की कीमत कंपनी को भारी घाटे के रूप में चुकानी पड़ी है।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, FY23 से FY26 के बीच कंपनी का संचयी घाटा लगभग ₹11,793 करोड़ तक पहुंच चुका है। इस अवधि में कंपनी किसी भी वित्तीय वर्ष में लाभ दर्ज नहीं कर पाई।
दूसरी ओर, Zepto लगभग ₹9,500 करोड़ जुटाने वाले संभावित IPO की तैयारी कर रही है। ऐसे में निवेशकों के बीच यह चर्चा स्वाभाविक है कि क्या कंपनी की वर्तमान वृद्धि भविष्य में स्थायी मुनाफे में बदल पाएगी।
असली सवाल ग्रोथ नहीं, बिजनेस मॉडल का है
यह कहना गलत होगा कि Zepto बढ़ नहीं रही है। कंपनी ने कम समय में उल्लेखनीय विस्तार किया है और क्विक-कॉमर्स बाजार में अपनी मजबूत जगह बनाई है।
लेकिन शेयर बाजार के निवेशक आमतौर पर एक अलग सवाल पूछते हैं—क्या यह मॉडल लंबे समय में लाभदायक साबित हो सकता है?
क्विक-कॉमर्स कारोबार केवल डिलीवरी तक सीमित नहीं है। इसके लिए डार्क स्टोर, वेयरहाउस, इन्वेंट्री, तकनीक, डिलीवरी नेटवर्क, कर्मचारियों और ग्राहकों को जोड़ने पर लगातार भारी खर्च करना पड़ता है। कंपनियों का तर्क है कि जैसे-जैसे कारोबार का आकार बढ़ता है, परिचालन लागत बेहतर तरीके से नियंत्रित की जा सकती है। हालांकि यह दावा भविष्य में कितना सफल साबित होगा, यह अभी भी निवेशकों की निगरानी में है।
प्रतिस्पर्धा कम होने के संकेत नहीं
Zepto ऐसे बाजार में काम कर रही है जहां प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र है। Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और अन्य बड़े खिलाड़ी लगातार विस्तार और ग्राहक अधिग्रहण पर निवेश कर रहे हैं।
इस वजह से कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना या मार्जिन सुधारना आसान नहीं है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए डिस्काउंट, ऑफर और तेज डिलीवरी जैसी रणनीतियां जारी हैं।
निवेशकों के सामने यहां एक और अहम सवाल खड़ा होता है—क्या भविष्य में यह उद्योग लाभ कमाने की दिशा में बढ़ेगा या प्रतिस्पर्धा लगातार मुनाफे पर दबाव बनाए रखेगी?
IPO से जुटने वाली राशि का क्या महत्व है?
कंपनी द्वारा जुटाई जाने वाली पूंजी का एक बड़ा हिस्सा विस्तार योजनाओं और बैलेंस शीट को मजबूत करने में उपयोग होने की संभावना है।
Zepto के समर्थकों का मानना है कि कंपनी अभी विकास के चरण में है और वर्तमान घाटे को बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि भारत का क्विक-कॉमर्स बाजार अभी शुरुआती अवस्था में है और आने वाले वर्षों में इसमें बड़ी संभावनाएं हैं।
वहीं आलोचक यह सवाल उठा रहे हैं कि लगातार बढ़ते घाटे के बीच केवल ग्रोथ को आधार बनाकर ऊंचा मूल्यांकन किस हद तक उचित ठहराया जा सकता है।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह IPO?
इस पूरे मुद्दे में कहीं भी किसी प्रकार की अनियमितता या गलत काम का आरोप नहीं है। तकनीक आधारित और उपभोक्ता इंटरनेट कंपनियों में शुरुआती वर्षों में घाटा होना असामान्य नहीं माना जाता।
फिर भी, निजी निवेशकों और सार्वजनिक बाजार के निवेशकों की अपेक्षाएं अलग होती हैं। सार्वजनिक बाजार आमतौर पर भविष्य की कमाई और लाभप्रदता को लेकर अधिक स्पष्टता चाहता है।
यही कारण है कि Zepto का IPO केवल एक कंपनी का सार्वजनिक निर्गम नहीं माना जा रहा, बल्कि यह भारत के पूरे क्विक-कॉमर्स सेक्टर की आर्थिक व्यवहार्यता की भी परीक्षा बन सकता है।
आखिरकार निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा—क्या Zepto ने जो आकार हासिल किया है, वह आने वाले वर्षों में टिकाऊ मुनाफे में बदल सकेगा, या फिर तेज़ वृद्धि के बावजूद लाभप्रदता अभी भी दूर की मंजिल बनी रहेगी?



