राजनांदगांव चेस हब योजना को लेकर एक बड़ी पहल सामने आई है। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव के दिग्विजय स्टेडियम में शतरंज का प्रशिक्षण ले रहे नन्हे खिलाड़ियों से मुलाकात कर जिले को राज्य के प्रमुख चेस हब के रूप में विकसित करने की बात कही। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राजनांदगांव में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
रायपुर से जारी जानकारी के मुताबिक डॉ. रमन सिंह ने दिग्विजय स्टेडियम पहुंचकर शतरंज प्रशिक्षण ले रहे बच्चों से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से बातचीत कर उनके प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खेल के अनुभवों के बारे में जानकारी ली।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि अब शतरंज को विशेष प्राथमिकता देते हुए राजनांदगांव जिले को राज्य के चेस हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक सुनियोजित कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि खिलाड़ियों को वर्षभर उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक दिग्विजय स्टेडियम अब सिर्फ खेल का मैदान नहीं, बल्कि भविष्य के चैंपियन तैयार करने का केंद्र बनता जा रहा है।
डॉ. रमन सिंह ने यह भी बताया कि स्टेडियम में खिलाड़ियों की सुविधा के लिए करीब 29 लाख रुपये की लागत से खेल अधोसंरचना और आवश्यक सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। उनका कहना था कि शतरंज जैसे बौद्धिक खेल युवाओं की सोच और ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्टेडियम भ्रमण के दौरान डॉ. रमन सिंह ने सात वर्षीय नन्हीं खिलाड़ी माहिका डाकलिया से भी विशेष मुलाकात की। कक्षा दूसरी में पढ़ने वाली माहिका ने उन्हें बताया कि वह गत वर्ष ओडिशा के खुर्दा रोड में आयोजित राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता के अंडर-7 आयु वर्ग में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
माहिका की उपलब्धि और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर डॉ. रमन सिंह ने उनकी सराहना की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली बच्चे आने वाले समय में राज्य और देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
राजनांदगांव में शतरंज को नई पहचान देने की इस पहल को खेल जगत में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। खिलाड़ियों और अभिभावकों को उम्मीद है कि इससे जिले में शतरंज को बढ़ावा मिलेगा और नई प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिलेगा।



