रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान पूनम ऑरन ने कंधे की चोट के बावजूद महिला 50 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में तेलंगाना की के. गीता को हराकर पहला स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता के दौरान वह बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर उतरीं और पूरे मुकाबले में चोट के बावजूद खेल जारी रखा।
मुकाबले के दौरान पूनम के खेल में दर्द के संकेत स्पष्ट थे, लेकिन उन्होंने अंत तक संघर्ष करते हुए जीत दर्ज की। प्रतियोगिता के बाद उन्होंने बताया कि कंधे की चोट पुरानी है और प्रशिक्षण के दौरान दोबारा उभर आई थी, इसके बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने का निर्णय लिया।
पूनम झारखंड के चतरा जिले के सुइयाबार गांव की रहने वाली हैं और पिछले कई वर्षों से रांची में रहकर प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में कुश्ती की शुरुआत की थी, लेकिन शुरुआती दौर में ही चोट के कारण उन्हें लगभग एक वर्ष तक खेल से दूर रहना पड़ा। वापसी के बाद उन्होंने 2018 और 2019 में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया प्रतियोगिताओं में कांस्य पदक जीते। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक बड़े स्तर पर पदक नहीं मिल सका।
उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता से पहले भी वह पूरी तरह फिट नहीं थीं, लेकिन कोच और सहयोगी स्टाफ के भरोसे के कारण उन्होंने हिस्सा लिया। परिवार की ओर से मना करने के बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में उतरकर प्रदर्शन किया। करीब छह वर्षों के बाद स्वर्ण पदक हासिल करना उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

ऑरन समुदाय से आने वाली पूनम अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं और रांची विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक कर रही हैं। खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखते हुए उन्होंने अपने प्रदर्शन को बेहतर किया है।
पूनम ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य जूनियर नेशनल ट्रायल्स के लिए चयनित होना है। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता में मिली सफलता को आगे भी बनाए रखने का प्रयास करेंगी। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस मंच पर उनका प्रदर्शन जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।


